हिसार में नहरी पानी की किल्लत पर आठ घंटे चली मैराथन बैठक, सिंचाई विभाग ने मांगों पर दिया आश्वासन
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के उच्च अधिकारियों और चार किसान जल संघर्ष समितियों के प्रतिनिधियों के बीच बुधवार को हिसार के कैनाल रेस्ट हाउस में करीब आठ घंटे तक बैठक हुई। अधिकारियों ने कई मांगों पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

टेल क्षेत्र के किसानों की समस्याओं पर मंथन
हरियाणा के हिसार स्थित कैनाल रेस्ट हाउस में बुधवार को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के उच्च अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब आठ घंटे तक चली इस मैराथन वार्ता का मुख्य उद्देश्य टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी की आपूर्ति में आ रही बाधाओं को दूर करना था। बैठक में चार प्रमुख किसान जल संघर्ष समितियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा।
बैठक की अध्यक्षता सिंचाई विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ राकेश चौहान ने की। उनके साथ चीफ इंजीनियर मोहनलाल राणा, विभिन्न जिलों के एसई और एक्सईएन स्तर के अधिकारी मौजूद रहे। किसान संगठनों की ओर से पगड़ी संभाल जट्टा, संयुक्त जल संघर्ष समिति, जल संघर्ष समिति और भाखड़ा जल संघर्ष समिति के पदाधिकारी वार्ता में शामिल हुए।
32 प्रमुख मांगों पर विस्तृत चर्चा
संयुक्त जल संघर्ष समिति ने विभाग के सामने नहरी पानी से जुड़े कुल 32 मुद्दे उठाए। इनमें नहरों की रिमॉडलिंग, क्षमता वृद्धि, रैजिंग और मानसून के दौरान पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना प्रमुख था। किसानों ने स्पष्ट किया कि नहरों में जगह-जगह हो रहे पेंचर और पानी की चोरी के कारण अंतिम छोर (टेल) तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है।
किसानों ने मांग की कि बरवाला लिंक, बालसमंद ब्रांच और बासड़ा-2 जैसी महत्वपूर्ण नहरों की रिमॉडलिंग का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। इसके अलावा, नहरों की नियमित सफाई और साइफन व्यवस्था में सुधार की मांग भी रखी गई ताकि पानी का प्रवाह बिना किसी रुकावट के बना रहे।
सीसवाला हेड और रिमॉडलिंग पर मिली उम्मीद
वार्ता के दौरान सीसवाला हेड पर कम से कम 200 क्यूसेक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग प्रमुखता से उठी। प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि बालसमंद और आसपास के टेल क्षेत्रों में सिंचाई की समस्या तभी हल हो सकती है जब वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाए। साथ ही, राजस्थान जाने वाली यमुना जल परियोजना से अतिरिक्त पानी की मांग भी रखी गई।
बासड़ा-2 नहर की रिमॉडलिंग का मुद्दा भी चर्चा में रहा, जो वर्ष 2018 से लंबित है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि इस परियोजना की प्रक्रिया को गति दी जा रही है और आगामी छह महीनों के भीतर इसके टेंडर जारी होने की संभावना है। विभाग ने यह भी भरोसा दिलाया कि रिमॉडलिंग के बाद नहरों के किनारों पर मिट्टी का कार्य पूर्ण किया जाएगा ताकि भविष्य में कटाव की समस्या न हो।
निरीक्षण और भविष्य की कार्ययोजना
किसान प्रतिनिधियों ने मांग की कि विभाग के उच्च अधिकारी स्वयं टेल क्षेत्रों का औचक निरीक्षण करें ताकि पानी वितरण की वास्तविक स्थिति का पता चल सके। अधिकारियों ने कई मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस बैठक को नहरी पानी की समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आठ घंटे तक चली इस लंबी चर्चा के बाद किसान संगठनों ने उम्मीद जताई है कि विभाग द्वारा दिए गए आश्वासन धरातल पर जल्द दिखाई देंगे। यदि इन मांगों पर समयबद्ध तरीके से काम होता है, तो हिसार के टेल क्षेत्र के हजारों किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!