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हरियाणा: 63 साल की उम्र में दादी ने पास की 10वीं की परीक्षा, अब सरपंच बनने का है सपना

Haryana Mahendragarh 63-year-old Dadi Sushila Devi clears 10th exam dreams of sarpanch election. कहते हैं कुछ सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। इस बात को सच कर दिखाया है हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की 63 वर्षीय सुशीला देवी ने।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

19 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 1.4K
हरियाणा: 63 साल की उम्र में दादी ने पास की 10वीं की परीक्षा, अब सरपंच बनने का है सपना
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उम्र को मात देकर सुशीला देवी ने रचा इतिहास

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की 63 वर्षीय सुशीला देवी ने साबित कर दिया है कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। उन्होंने इस उम्र में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) से 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। सुशीला देवी ने 79.6 प्रतिशत अंक हासिल कर न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल भी पेश की है।

सुशीला देवी ने अंग्रेजी में 89, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में 88, गणित में 78, पेंटिंग में 76 और हिंदी में 67 अंक प्राप्त किए हैं। उनकी इस सफलता के पीछे वर्षों पुरानी वह कसक है, जो बचपन में पढ़ाई छूट जाने के कारण उनके मन में दबी हुई थी। पांचवीं कक्षा तक पढ़ने के बाद पारिवारिक परिस्थितियों और सामाजिक सोच के कारण उन्हें अपनी शिक्षा अधूरी छोड़नी पड़ी थी।

बेटे के प्रोत्साहन से जगी पढ़ाई की इच्छा

सुशीला देवी का मायका रेवाड़ी के भडंगी गांव में है। बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखने वाली सुशीला ने पांचवीं कक्षा तक गांव के स्कूल में पढ़ाई की थी और स्कॉलरशिप भी हासिल की थी। हालांकि, उनके दादा रामस्वरूप बोहरा की सोच के कारण उन्हें आगे पढ़ने के लिए कस्बे में जाने की अनुमति नहीं मिली। 1981 में शादी के बाद भी उन्होंने अखबार पढ़ने की आदत को बरकरार रखा, जिससे उनका ज्ञान निरंतर बना रहा।

उनके बेटे विष्णु ने जब उन्हें अखबार पढ़ते हुए देखा, तो उन्होंने मां से आगे पढ़ने की इच्छा पूछी। बेटे के इस सवाल ने सुशीला के मन में दबी पढ़ाई की चाहत को फिर से जगा दिया। बेटे ने न केवल उनका हौसला बढ़ाया, बल्कि NIOS में उनका दाखिला करवाकर 10वीं की परीक्षा के लिए फॉर्म भी भरवाया।

तैयारी के दौरान सुशीला देवी को गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों में कठिनाई का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और दिन में तीन से चार घंटे पढ़ाई को दिए। इस सफर में उनके पति बाबूलाल और बच्चों ने उन्हें पूरा सहयोग दिया, जिससे वे कठिन विषयों पर पकड़ बनाने में सफल रहीं।

अब 12वीं की तैयारी और राजनीति में कदम रखने की योजना

10वीं की परीक्षा में मिली शानदार सफलता ने सुशीला देवी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा दिया है। अब उन्होंने 12वीं कक्षा की परीक्षा देने का मन बना लिया है। उनका मानना है कि अगर मन में सच्ची लगन हो, तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत की जा सकती है। वे अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

पढ़ाई पूरी करने के बाद सुशीला देवी के मन में अब एक नया सपना पल रहा है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि गांव के लोग चाहेंगे, तो वे भविष्य में सरपंच का चुनाव भी लड़ सकती हैं। उनके बेटे विष्णु पहले सरपंच रह चुके हैं, और अब सुशीला देवी का शिक्षित होना उन्हें गांव के विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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