अजमेर: रिटायर्ड नगर निकाय कमिश्नर को ठगने की कोशिश, पुलिस अधिकारी बनकर दी धमकी
Ajmer cyber fraud attempt on retired commissioner by fake police inspector. अजमेर में साइबर ठगों ने नगर निकाय के रिटायर्ड पूर्व कमिश्नर को निशाना बनाते हुए ऑनलाइन ठगी की कोशिश की। ठग ने पुलिस थाना प्रभारी की प्रोफाइल फोटो लगाकर कॉल किया और खुद को थाना प्रभारी बताकर धमकाने लगा।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

पुलिस अधिकारी के नाम पर ठगी का जाल
अजमेर में साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड नगर निकाय कमिश्नर को अपना निशाना बनाने की कोशिश की। ठगों ने खुद को पुलिस थाना प्रभारी बताकर डराने-धमकाने का प्रयास किया, लेकिन पीड़ित की सतर्कता के कारण वे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके। यह मामला शहर के व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक पूर्व अधिकारी को फर्जी कॉल के जरिए ठगने की साजिश रची गई।
पीड़ित नारायण लाल मीणा, जो नगर निकाय के पूर्व कमिश्नर रह चुके हैं, का जनाना रोड पर लक्ष्मी एंटरप्राइजेज के नाम से टाइल्स और सेनेटरी का शोरूम है। उन्होंने बताया कि उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति का कॉल आया जिसने खुद को एक सरकारी स्कूल का शिक्षक बताया। आरोपी ने शोरूम से 15 पेटी टाइल्स खरीदने का ऑर्डर दिया और इसकी कुल कीमत साढ़े सात हजार रुपये तय हुई।
गलती से पैसे भेजने का झांसा
टाइल्स का ऑर्डर देने के कुछ देर बाद ही पीड़ित को एक मैसेज प्राप्त हुआ, जिसमें 75 हजार रुपये जमा होने का दावा किया गया था। ठग ने तुरंत कॉल करके कहा कि उसने गलती से 75 हजार रुपये भेज दिए हैं। उसने पीड़ित से अनुरोध किया कि वे साढ़े सात हजार रुपये काटकर बाकी राशि उसे वापस ट्रांसफर कर दें। पीड़ित ने मैनेजर के आने पर ही भुगतान की जांच करने की बात कही।
इसके तुरंत बाद, एक और कॉल आया। इस बार कॉलर ने खुद को सदर थाने का प्रभारी दलबीर बताया। ठग ने अपनी व्हाट्सएप प्रोफाइल पर पुलिस की वर्दी पहने हुए फोटो लगा रखी थी ताकि पीड़ित को यकीन हो जाए कि वह वास्तव में पुलिस अधिकारी से बात कर रहा है।
सतर्कता से बची बड़ी रकम
ठग ने पुलिस अधिकारी के रौब में आकर पूर्व कमिश्नर को धमकाना शुरू कर दिया। हालांकि, पीड़ित ने तुरंत स्थिति को भांप लिया। उन्हें इस बात पर संदेह हुआ कि अजमेर में कोई 'सदर थाना' नहीं है। इसके अलावा, पुलिस के नाम पर इस तरह की भाषा और दबाव बनाने के तरीके ने ठग की पोल खोल दी।
पूर्व कमिश्नर ने ठग की बदतमीजी का जवाब देते हुए उसे फटकार लगाई और किसी भी प्रकार का पैसा ट्रांसफर करने से साफ इनकार कर दिया। ठग ने काफी दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन पीड़ित के अडिग रहने के कारण वह कोई भी आर्थिक नुकसान पहुंचाने में विफल रहा।
साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज कराई शिकायत
ठगों के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद, नारायण लाल मीणा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर इसकी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जी कॉल के पीछे कौन सा गिरोह सक्रिय है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी अब रिटायर्ड अधिकारियों और प्रतिष्ठित लोगों को निशाना बनाने के लिए पुलिस की पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाले ऐसे कॉल या संदेशों पर भरोसा न करें और तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
