हरदा नगर पालिका में सियासी घमासान: कांग्रेस ने किया बैठकों के बहिष्कार का ऐलान
हरदा नगर पालिका में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। 17 जुलाई को नगर पालिका सभागार में हुए सामान्य सम्मेलन के दौरान भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी बहस हुई थी।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

नगर पालिका सम्मेलन में हंगामे के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव
मध्य प्रदेश के हरदा नगर पालिका में 17 जुलाई को आयोजित सामान्य सम्मेलन के दौरान हुई तीखी बहस अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गई है। इस घटना के बाद से सत्ताधारी दल भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस ने अब परिषद की आगामी बैठकों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
विवाद की शुरुआत 17 जुलाई को हुई थी, जब नगर पालिका सभागार में आयोजित सम्मेलन के दौरान भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके अगले दिन, 18 जुलाई को नगर पालिका उपाध्यक्ष अंशुल गोयल और अन्य भाजपा पदाधिकारियों ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। भाजपा का आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष अमर रोचलानी ने महिला अध्यक्ष के साथ अभद्र व्यवहार किया और गरिमा के विरुद्ध जाकर चिल्लाकर बात की।
कांग्रेस का पलटवार: आरोपों को बताया निराधार
सोमवार को कांग्रेस ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर भाजपा के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पिछले चार वर्षों से नगर पालिका में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। महिला पार्षद सुप्रिया पटेल ने स्पष्ट किया कि सम्मेलन के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने कोई अभद्रता नहीं की, बल्कि वे शहर की समस्याओं को प्रमुखता से उठा रहे थे।
नेता प्रतिपक्ष अमर रोचलानी ने बताया कि उस दिन उनके साथी पार्षद अक्षय उपरीत शहर में मिल रहे दूषित पानी का मुद्दा उठाने के लिए पानी की बोतल लेकर आए थे। इसी बात को लेकर भाजपा पार्षद उत्तेजित हो गए। रोचलानी ने दावा किया कि उन्होंने किसी भी महिला पदाधिकारी के प्रति व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की, बल्कि सीएमओ के समक्ष जनहित के मुद्दे रखे थे।
जांच की मांग और बहिष्कार की चेतावनी
कांग्रेस पार्षदों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। रोचलानी ने जानकारी दी कि कांग्रेस के सभी दस पार्षद कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंप रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि जब तक इस मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक कांग्रेस के सदस्य नगर पालिका की किसी भी बैठक में शामिल नहीं होंगे।
कांग्रेस ने भाजपा पर जनविरोधी फैसले लेने का आरोप भी लगाया है। रोचलानी ने कहा कि जलकर की दरों में भारी वृद्धि और धर्मशाला शुल्क में बढ़ोतरी जैसे फैसले जनता पर बोझ डाल रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ शिकायत करने वाले लोग परिषद के सदस्य तक नहीं हैं और यह सब आगामी चुनावों को देखते हुए रची गई एक राजनीतिक साजिश है।
भाजपा का रुख: वीडियो साक्ष्य का हवाला
दूसरी ओर, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष नीतेश बादर ने अपने लेटरहेड पर कलेक्टर को शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि सम्मेलन का वीडियो इस बात का प्रमाण है कि नेता प्रतिपक्ष का व्यवहार अमर्यादित था। भाजपा का तर्क है कि वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से एक महिला अध्यक्ष के सामने चिल्लाकर बात की गई, जो कि किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए उचित नहीं है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
