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ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब, 2000 करोड़ के निवेश से बदलेंगे रोजगार के समीकरण

देश की राजधानी दिल्ली में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय दूरसंचार विभाग के बीच एक बड़ा एमओयू हुआ है, जिसके तहत ग्वालियर अंचल में 170 एकड़ ज़मीन पर देश का पहला इंटीग्रेटेड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी ईकोसिस्टम स्थापित होने जा रहा है।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

30 जुलाई 2026 अपडेट 30 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब, 2000 करोड़ के निवेश से बदलेंगे रोजगार के समीकरण
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मध्य प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय दूरसंचार विभाग के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत ग्वालियर में देश का पहला इंटीग्रेटेड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम स्थापित किया जाएगा। यह परियोजना न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के दूरसंचार क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

170 एकड़ में फैलेगा अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग जोन

ग्वालियर में प्रस्तावित यह मैन्युफैक्चरिंग जोन 170 एकड़ की विशाल भूमि पर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में शुरुआती तौर पर 2000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस इकोसिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां टेलीकॉम उत्पादों की पूरी वैल्यू चेन एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगी। इसमें प्रोडक्ट डिजाइन, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और एक्सपोर्ट जैसी सभी सुविधाएं शामिल होंगी, जिससे कंपनियों को अलग-अलग शहरों में भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

यह जोन 'प्लग एंड प्ले' मॉडल पर आधारित होगा, जिसका अर्थ है कि निवेशकों को बुनियादी ढांचा पहले से तैयार मिलेगा। इससे कंपनियां बिना किसी देरी के अपना उत्पादन कार्य शुरू कर सकेंगी। इस केंद्र में मुख्य रूप से 5G, 6G उपकरणों, ऑप्टिकल फाइबर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइस और सेमीकंडक्टर से जुड़े हार्डवेयर का निर्माण किया जाएगा।

रोजगार के नए अवसर और सरकारी प्रोत्साहन

इस परियोजना से रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होने की उम्मीद है। शुरुआती चरण में 4500 प्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है, जबकि भविष्य में यह आंकड़ा 8 से 9 हजार तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार इस परियोजना के लिए 500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। वहीं, राज्य सरकार निवेशकों को आकर्षित करने के लिए स्टाम्प ड्यूटी में 100 प्रतिशत रिइम्बर्समेंट और रियायती दरों पर बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब मध्य प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम क्षेत्र में दक्षिण भारत के राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार है। उन्होंने इसे प्रदेश के युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर बताया है।

रणनीतिक महत्व और भविष्य की राह

केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि निवेशकों को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस प्रोजेक्ट की राह को सुगम बनाएंगे। ग्वालियर का चयन उसकी भौगोलिक स्थिति और दिल्ली-आगरा जैसे प्रमुख शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण किया गया है, जो लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट के लिए बेहद अनुकूल है।

यह प्रोजेक्ट केवल उपकरणों के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह क्षेत्र रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे उभरते उद्योगों के लिए भी एक आधार तैयार करेगा। पिछले डेढ़ साल की निरंतर मेहनत के बाद अब यह परियोजना धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो मध्य प्रदेश को तकनीकी हब के रूप में नई पहचान दिलाएगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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