गुरुग्राम एनकाउंटर: रोहतक के तीन युवकों की मौत से भालौठ गांव में मातम, परिजनों ने उठाए सवाल
Gurugram Police encounter 3 Rohtak youths killed. रोहतक के गांव भालौठ निवासी तीन युवकों का गुरुग्राम में पुलिस द्वारा किए गए एनकाउंटर के बाद गांव में गमगीन माहौल है। मृतकों के शव देखकर परिजन बिलख पड़े।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

गुरुग्राम में हाल ही में हुए एक पुलिस एनकाउंटर में रोहतक जिले के गांव भालौठ के तीन युवकों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मृतकों में दो नाबालिग भी शामिल हैं। इस घटना के बाद से ही गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे गलत बताया है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, गुरुग्राम के एक व्यवसायी को दीपक नांदल गैंग की ओर से लगातार धमकियां मिल रही थीं। इसी दौरान कुछ हथियारबंद युवक एक स्कार्पियो गाड़ी में सवार होकर व्यवसायी के घर पहुंचे और उन्हें बंधक बना लिया। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की। इस दौरान दोनों तरफ से करीब 65 राउंड फायरिंग हुई, जिसमें तीन पुलिसकर्मी और एक आरोपी घायल हो गए। मुठभेड़ में चार आरोपी मारे गए, जिनमें से तीन रोहतक के भालौठ गांव के निवासी थे।
मृतक अंकित की मां ने बताया कि उनका बेटा घर से मात्र 200 रुपये लेकर हरिद्वार कांवड़ लाने की बात कहकर निकला था। वह चार बहनों का इकलौता भाई था और मजदूरी करता था। 10 जुलाई को पुलिस का फोन आया और उन्हें अंकित के बारे में जानकारी दी गई। मां का कहना है कि उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा कि उनका बेटा किसी आपराधिक घटना में शामिल हो सकता है।
खिलाड़ी और मेहनती युवक थे मृतक
मृतकों में शामिल आर्यन एक स्टेट लेवल का जैवलिन थ्रो खिलाड़ी था और नियमित रूप से राजीव गांधी स्टेडियम में अभ्यास करता था। उसके कोच सुनील फोगाट के अनुसार, आर्यन का व्यवहार बेहद सरल था और वह कभी किसी गलत संगत में नहीं दिखा। वहीं, नितिन गांव में ही बाइक रिपेयरिंग की दुकान चलाता था। सरपंच कुलदीप ने बताया कि नितिन का स्वभाव भी सामान्य था, हालांकि पूर्व में उस पर एक मामले में शामिल होने का आरोप लगा था।
परिजनों का कहना है कि अंकित की उम्र अभी 17 साल भी नहीं हुई थी और अगले महीने उसका जन्मदिन था। परिवार को इस बात का गहरा सदमा है कि वह बिना बताए कभी घर से दूर नहीं रहा था। ग्रामीणों का मानना है कि पुलिस को उन्हें जिंदा पकड़ने का प्रयास करना चाहिए था, न कि सीधे जान से मारना।
जांच का विषय
गांव के सरपंच और ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वे यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ये युवक किस तरह के लालच या दबाव में आकर इस रास्ते पर गए। फिलहाल, तीनों युवकों का अंतिम संस्कार गमगीन माहौल में कर दिया गया है, लेकिन गांव में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि ये युवक गैंगस्टर के चंगुल में कैसे फंसे। इस घटना ने एक बार फिर युवाओं के अपराध की ओर बढ़ने और पुलिस एनकाउंटर की प्रक्रिया पर बहस छेड़ दी है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
