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गाजीपुर हत्याकांड: 2016 के मर्डर केस में दो सगे भाइयों को उम्रकैद, कोर्ट ने सुनाया फैसला

Ghazipur court convicts two brothers for 2016 murder case, orders life imprisonment and fine. गाजीपुर की अपर सत्र न्यायाधीशविशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट संजय के लाल की अदालत ने 2016 के एक हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दो सगे भाइयों अरुण कुमार राय और विमलेश राय उर्फ मुन्नू को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor in chief

6 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें 1.3K
गाजीपुर हत्याकांड: 2016 के मर्डर केस में दो सगे भाइयों को उम्रकैद, कोर्ट ने सुनाया फैसला
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आठ साल पुराने मामले में न्याय

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की एक अदालत ने वर्ष 2016 में हुए एक चर्चित हत्याकांड में अपना फैसला सुनाते हुए दो सगे भाइयों को दोषी करार दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट संजय के लाल की अदालत ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले ने आठ साल से लंबित इस मामले में न्याय की प्रक्रिया को पूरा किया है।

अदालत ने सजा के साथ-साथ दोनों दोषियों पर भारी जुर्माना भी लगाया है। दोनों भाइयों पर कुल 1 लाख 5 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। इसके अलावा, मुख्य आरोपी अरुण कुमार राय को आयुध अधिनियम के तहत अवैध हथियार रखने और इस्तेमाल करने के जुर्म में अतिरिक्त तीन वर्ष की जेल और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा भी दी गई है।

क्या था पूरा मामला

यह घटना जमानियां थाना क्षेत्र के सोनहरिया गांव की है। 21 जून 2016 की रात करीब 8:30 बजे अछेबर नाथ राय अपने किसी परिचित से मिलकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में घात लगाकर बैठे अरुण कुमार राय और विमलेश राय उर्फ मुन्नू ने उन पर हमला कर दिया। आरोपियों ने अवैध कट्टे से अछेबर नाथ राय पर फायरिंग कर दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और परिजन तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। घायल अवस्था में अछेबर नाथ राय को आनन-फानन में जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से ही गांव में दहशत का माहौल फैल गया था।

कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्य

मृतक की पत्नी मैना देवी की तहरीर पर जमानियां थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने साक्ष्यों को जुटाकर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता रामकुमार राय ने प्रभावी पैरवी की। अदालत के समक्ष सात गवाह पेश किए गए, जिन्होंने घटनाक्रम और साक्ष्यों की पुष्टि की। दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों के गहन परीक्षण के बाद अदालत ने अरुण कुमार राय और विमलेश राय को हत्या का दोषी माना।

फैसले का महत्व

इस फैसले को क्षेत्र में कानून व्यवस्था के प्रति एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। आठ साल तक चले इस कानूनी संघर्ष के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। अदालत का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि जघन्य अपराधों में शामिल दोषियों को कानून के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता, चाहे मामला कितना भी पुराना क्यों न हो।

दोषियों को अब अपनी शेष सजा जेल में काटनी होगी। अर्थदंड की राशि का भुगतान न करने पर उन्हें अतिरिक्त सजा का सामना भी करना पड़ सकता है। फिलहाल, इस फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर जारी है और पीड़ित परिवार ने अदालत के इस निर्णय पर संतोष व्यक्त किया है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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