एटा: नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म मामले में दो दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना
Etah minor gang rape case verdict, two convicts sentenced to life imprisonment. एटा में 2020 में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोनों पर 50-50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के चार साल पुराने मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। विशेष न्यायालय ने इस वीभत्स घटना के लिए दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों अपराधियों पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने का निर्देश दिया गया है।
क्या थी घटना और कैसे दर्ज हुआ मामला
यह घटना 16 नवंबर 2020 की है, जो अलीगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत घटित हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 16 वर्ष से कम आयु की पीड़िता को आरोपियों ने जबरन एक शौचालय में बंद कर दिया था। इसके बाद दोनों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। विरोध करने पर आरोपियों ने पीड़िता के साथ मारपीट की, उसे गालियां दीं और जान से मारने की धमकी देकर वहां से फरार हो गए।
पीड़िता की शिकायत पर अलीगंज थाने में मुकदमा संख्या 395/2020 दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और नगला सावा निवासी आकाश और अनिल कुमार उर्फ मंगली को मुख्य आरोपी के रूप में नामजद किया। इन पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम और एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोप तय किए गए थे।
अदालत ने दोषियों को नहीं दी कोई राहत
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने दोषियों के वृद्ध माता-पिता और उनकी पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अदालत से नरमी बरतने की अपील की थी। हालांकि, विशेष लोक अभियोजक ने अपराध की क्रूरता और पीड़िता पर पड़े मानसिक प्रभाव को रेखांकित करते हुए अधिकतम सजा की मांग की। अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे अपराध समाज के लिए कलंक हैं और दोषी किसी भी प्रकार की सहानुभूति के हकदार नहीं हैं।
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को धारा 376-डी (सामूहिक दुष्कर्म), 342, 504 और 506 के तहत दोषी करार दिया। सजा सुनाते हुए न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि आजीवन कारावास के साथ-साथ दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, अन्य धाराओं के तहत भी अलग-अलग सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
पीड़िता को मिलेगा प्रतिकर
अदालत ने अपने आदेश में यह सुनिश्चित किया है कि दोषियों से वसूले जाने वाले कुल एक लाख रुपये की राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाए। यह राशि पीड़िता के पुनर्वास और न्याय के प्रति विश्वास को बहाल करने में सहायक होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और जेल में बिताई गई अवधि को कुल सजा में समायोजित किया जाएगा।
फैसला सुनाए जाने के बाद दोषियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत अपील करने के उनके वैधानिक अधिकारों के बारे में सूचित कर दिया गया है। इस निर्णय को क्षेत्र में महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के प्रति एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों और गवाहों के बयानों ने अदालत को दोषियों को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
