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ग्रैंड वेनेजिया प्रोजेक्ट घोटाला: ईडी ने 700 करोड़ की 389 संपत्तियां की कुर्क

ED attaches properties in Noida and Goa linked to Bhasin Infotech money laundering case. प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 389 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनली अटैच) किया है। इन संपत्तियों की खरीद कीमत 240.03 करोड़ रुपये जबकि वर्तमान बाजार मूल्य 700 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

21 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 288
ग्रैंड वेनेजिया प्रोजेक्ट घोटाला: ईडी ने 700 करोड़ की 389 संपत्तियां की कुर्क
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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े मामले में 389 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इन संपत्तियों की खरीद के समय की कीमत 240.03 करोड़ रुपये थी, लेकिन वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार इनकी कीमत 700 करोड़ रुपये से भी अधिक आंकी गई है। यह कार्रवाई भसीन इन्फोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (BIIPL) और ग्रैंड वेनेजिया कमर्शियल टावर्स प्राइवेट लिमिटेड (GVCTPL) से संबंधित जांच का हिस्सा है।

जांच एजेंसी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में ग्रेटर नोएडा स्थित ग्रैंड वेनेजिया मॉल की 384 व्यावसायिक इकाइयां और दुकानें शामिल हैं, जिनकी कीमत लगभग 203 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त, गोवा में स्थित पांच महंगी संपत्तियों को भी जब्त किया गया है, जिनकी कीमत करीब 37 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह पूरा मामला सतिंदर सिंह भसीन और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज जांच से जुड़ा है।

निवेशकों को झांसा देकर जुटाई गई थी भारी रकम

इस मामले की जड़ें उत्तर प्रदेश और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर में निहित हैं। आरोप है कि ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित ग्रैंड वेनेजिया कमर्शियल कॉम्प्लेक्स प्रोजेक्ट के नाम पर निवेशकों को लुभावने रिटर्न और समय पर दुकानों का कब्जा देने का वादा किया गया था। हालांकि, कंपनी अपने वादों को पूरा करने में विफल रही और न तो निवेशकों को उनकी संपत्ति का कब्जा मिला और न ही उनका पैसा वापस लौटाया गया।

ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि निवेशकों से ली गई इस बड़ी राशि को भसीन ग्रुप की अन्य कंपनियों के माध्यम से डायवर्ट किया गया। इस धन का उपयोग गोवा में महंगी संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया था। एजेंसी का यह भी आरोप है कि ग्रैंड वेनेजिया मॉल की 384 व्यावसायिक इकाइयों को फर्जी और बैकडेटेड दस्तावेजों का उपयोग करके ग्रैंड एक्सप्रेस डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हस्तांतरित कर दिया गया था, ताकि उन्हें कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) के दायरे से बाहर रखा जा सके।

लगातार जारी है जांच का दायरा

इस मामले में ईडी ने अप्रैल 2025 में व्यापक तलाशी अभियान चलाया था, जिसके दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और 36 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। उस समय कंपनी के एक बैंक खाते को भी फ्रीज कर दिया गया था। इसके बाद जून 2025 में भी एजेंसी ने 27 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर सतिंदर सिंह भसीन को मई 2026 में पीएमएलए (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

वर्तमान में सतिंदर सिंह भसीन न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की गहन जांच जारी है। प्रवर्तन निदेशालय इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या इस घोटाले में अन्य लोग भी शामिल थे और क्या इस धन का उपयोग कहीं और भी किया गया है। यह कार्रवाई रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ एक कड़ा संदेश मानी जा रही है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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