डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज में प्रसूता की मौत पर बवाल: परिजनों ने डॉक्टर को पीटा, अस्पताल में तोड़फोड़

मुश्ताक अहमद खान
Editor in chief

राजस्थान के डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को एक प्रसूता की मौत के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। अस्पताल में उपचार के दौरान महिला की मृत्यु से आक्रोशित परिजनों ने न केवल जमकर हंगामा किया, बल्कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के साथ मारपीट और अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ भी की। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश के बाद स्थिति को नियंत्रित किया।
क्या है पूरा मामला?
मृतक महिला की पहचान उदयपुर जिले के खेरवाड़ा स्थित सुलई आंकड़ी निवासी ललिता के रूप में हुई है, जो नीतेश मीणा की पत्नी थी। ललिता गर्भावस्था के दौरान अपने मायके ऋषभदेव के गरासिया फला में रह रही थी। प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन उसे पहले एक निजी अस्पताल ले गए थे, जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण ललिता की जान गई है। हंगामे के दौरान आक्रोशित लोगों ने अस्पताल के स्टाफ और डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार किया और अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इस घटना के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
जिला अस्पताल के अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ सिंह ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रसूता को जब अस्पताल लाया गया, तब उसकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी। जांच में पता चला कि गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि परिजन उसे किसी अन्य निजी अस्पताल ले जाने की जिद कर रहे थे, लेकिन रेफर की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया।
डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि अस्पताल की ओर से इलाज में कोई कोताही नहीं बरती गई। घटना के बाद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने संबंधित लोगों के खिलाफ मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज कराया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अस्पताल प्रशासन ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है, जो पूरी घटनाक्रम की समीक्षा करेगी।
प्रदेश में प्रसूताओं की मौत का आंकड़ा चिंताजनक
डूंगरपुर की यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने के भीतर पूरे प्रदेश में 34 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। बांसवाड़ा में भी हाल ही में प्रसूता की मौत का मामला सामने आया था, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर उचित उपचार न मिल पाना इन मौतों का एक बड़ा कारण हो सकता है। हालांकि, सरकारी अस्पताल इन दावों को नकारते हुए अपनी व्यवस्थाओं को दुरुस्त होने का दावा कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि मेडिकल कॉलेज की सेवाएं बाधित न हों।

Editor in chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
