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एशियन जूडो चैंपियनशिप: देवास की बेटी आकांक्षा श्रीवास्तव ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिखेरा जलवा

देवास जिले की जूडो खिलाड़ी आकांक्षा श्रीवास्तव ने एशियन जूडो कैडेट चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 70 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए प्रतियोगिता में सातवां स्थान हासिल किया।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

1 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें
एशियन जूडो चैंपियनशिप: देवास की बेटी आकांक्षा श्रीवास्तव ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिखेरा जलवा
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मध्य प्रदेश के देवास जिले की उभरती हुई जूडो खिलाड़ी आकांक्षा श्रीवास्तव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। हाल ही में संपन्न हुई एशियन जूडो कैडेट चैंपियनशिप में आकांक्षा ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उन्होंने 70 किलोग्राम भार वर्ग में सातवां स्थान हासिल कर न केवल अपने जिले का, बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है।

राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक से मिली पहचान

आकांक्षा श्रीवास्तव की यह सफलता अचानक नहीं मिली है। इससे पहले उन्होंने चंडीगढ़ में आयोजित नेशनल कैडेट जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की थी। राष्ट्रीय स्तर पर उनके इसी उत्कृष्ट प्रदर्शन और तकनीकी कौशल को देखते हुए उन्हें एशियन जूडो कैडेट चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया था। यह चयन उनके कठिन परिश्रम और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम है।

एशियन चैंपियनशिप जैसे बड़े मंच पर प्रतिस्पर्धा करना किसी भी खिलाड़ी के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। आकांक्षा ने 70 किलोग्राम भार वर्ग में कड़े मुकाबले के बीच खुद को साबित किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सातवां स्थान प्राप्त करना उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, जिससे उन्हें भविष्य में और भी बड़े टूर्नामेंटों के लिए आवश्यक अनुभव प्राप्त हुआ है।

सीमित संसाधनों के बावजूद बुलंद हौसले

आकांक्षा की इस यात्रा के पीछे उनके परिवार का अटूट समर्थन रहा है। उनके पिता एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं और परिवार के सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने आकांक्षा के खेल के प्रति जुनून को कभी कम नहीं होने दिया। परिवार का यह सहयोग ही है कि आकांक्षा ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जूडो के दांव-पेच सीखे और आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

देवास जिले के खेल प्रेमियों और स्थानीय निवासियों के लिए आकांक्षा की यह उपलब्धि गर्व का विषय है। प्रतियोगिता से लौटने के बाद उनका भव्य स्वागत किया गया। शहर के खेल जगत में उनकी इस सफलता को अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है, जो खेलों में अपना करियर बनाने का सपना देख रहे हैं।

भविष्य की राह और खेल जगत की उम्मीदें

एशियन चैंपियनशिप में मिली इस सफलता के बाद आकांक्षा के हौसले बुलंद हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उन्हें इसी तरह उचित मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिलता रहा, तो वह आने वाले समय में ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर भी भारत का नाम रोशन कर सकती हैं। उनकी तकनीकी पकड़ और जूडो के प्रति उनकी गंभीरता उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती है।

आकांक्षा की सफलता ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। देवास जैसे छोटे शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना आकांक्षा के संकल्प को दर्शाता है। खेल जगत के जानकारों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है और उम्मीद जताई है कि वह आने वाले वर्षों में भारतीय जूडो टीम के लिए एक मजबूत स्तंभ साबित होंगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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