राजस्थान क्रिकेट संघ चुनाव: बड़े नेताओं की सूची तैयार, लेकिन सत्ता की असली चाबी जिला सचिवों के हाथ में

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

आरसीए चुनाव का बिगुल: 29 सितंबर को तय होगी नई कार्यकारिणी
राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) के आगामी चुनावों के लिए आधिकारिक कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। चुनाव अधिकारी एके पांडे द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मतदान की प्रक्रिया 29 सितंबर को संपन्न होगी। इस चुनाव को लेकर राज्य के राजनीतिक और खेल गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है, क्योंकि इसमें कई बड़े राजनीतिक चेहरे अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी में हैं।
जारी की गई मतदाता सूची में कई वर्तमान मंत्रियों, विधायकों, पूर्व मंत्रियों और प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों के सदस्यों के नाम शामिल हैं। सूची में जयदीप बिहाणी, दर्शन सिंह गुर्जर, रतन देवासी और रोहित बोहरा जैसे प्रमुख नाम प्रमुखता से देखे जा सकते हैं। इनमें से कई नेता पहले भी आरसीए की एडहॉक कमेटी का हिस्सा रह चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि राज्य की राजनीति में सक्रिय लोग क्रिकेट प्रशासन पर अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए उत्सुक हैं।
वोटिंग का अधिकार और सचिवों का दबदबा
भले ही सूची में बड़े राजनीतिक नाम शामिल हों, लेकिन आरसीए की सत्ता की असली चाबी जिला क्रिकेट संघों के सचिवों के पास है। नियमों के अनुसार, केवल जिला संघों के सचिवों को ही मतदान करने का अधिकार प्राप्त है। इसके अतिरिक्त, दो पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी गगन खोड़ा और पंकज सिंह को भी मताधिकार दिया गया है। इस प्रकार, आरसीए का अगला अध्यक्ष कौन होगा, इसका अंतिम निर्णय जिला स्तर के सचिव ही करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के साथ ही जिला संघों के सचिवों की निष्ठाएं भी बदल जाती हैं। अक्सर देखा गया है कि ये सचिव सत्ताधारी दल के नेताओं के साथ तालमेल बिठाकर चलते हैं। वे अपने जिलों के प्रभावशाली नेताओं को अध्यक्ष या कोषाध्यक्ष के पदों पर तो बिठा देते हैं, लेकिन सचिव का पद अपने पास ही सुरक्षित रखते हैं ताकि संगठन पर उनका नियंत्रण बना रहे।
नए जिलों की सदस्यता पर बरकरार है संशय
चुनाव प्रक्रिया के बीच तीन नए जिलों—खैरथल-तिजारा, बालोतरा और कुचामन-डिडवाना—को मतदाता सूची में शामिल किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इन जिलों की सदस्यता की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि पिछले वर्ष रजिस्ट्रार सहकारिता ने इन्हें मान्यता देने से इनकार कर दिया था। साथ ही, आरसीए की एजीएम में भी इनकी सदस्यता को मंजूरी नहीं मिली थी।
इन जिलों को सूची में कैसे जगह मिली, यह एक बड़ा प्रश्न बना हुआ है। बीसीसीआई के नियमों के अनुसार, किसी भी संघ को जोड़ने या हटाने का अधिकार केवल एजीएम के पास होता है। आगामी 18 सितंबर को होने वाली बीसीसीआई की एजीएम में इस मुद्दे पर स्पष्टता आने की उम्मीद है, क्योंकि वहां अन्य सदस्य संघों के साथ-साथ सदस्यता संबंधी मामलों पर चर्चा की जानी है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
आरसीए के इस चुनाव में केवल नामचीन हस्तियों का होना ही काफी नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर जिला सचिवों का समर्थन हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती है। जो भी गुट सचिवों को अपने पक्ष में करने में सफल होगा, वही आरसीए की कमान संभालेगा। खेल प्रेमियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार आरसीए में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा या फिर पुरानी राजनीतिक परंपराएं ही हावी रहेंगी।
चुनाव अधिकारी द्वारा जारी कार्यक्रम के बाद अब नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी। 29 सितंबर के दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि राजस्थान क्रिकेट की बागडोर किसके हाथों में होगी। फिलहाल, सभी संबंधित पक्षों की निगाहें बीसीसीआई की आगामी बैठक और चुनाव अधिकारी के अगले निर्देशों पर टिकी हुई हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!