दिल्ली में कचरा प्रबंधन के लिए इंदौर मॉडल: एलजी ने एमसीडी को दिए पायलट प्रोजेक्ट के निर्देश
Delhi waste management plan LG TS Sandhu MCD review Indore model pilot project implementation. एलजी ने कहा कि दिल्ली में अभी भी करीब 50% कचरे का स्रोत पर पृथक्करण (सेग्रिगेशन) नहीं हो रहा है, जिससे बड़ी मात्रा में कचरा सीधे डंपसाइट तक पहुंच रहा है। उन्होंने एमसीडी के एक जोन में इंदौर नगर निगम के कचरा प्रबंधन मॉडल को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने के निर्देश दिए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजधानी में कचरा प्रबंधन को लेकर एलजी सख्त
दिल्ली की नागरिक सुविधाओं और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू ने नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में राजधानी में ठोस कचरा प्रबंधन की स्थिति, जलभराव की समस्या और आगामी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। एलजी ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में कचरा निस्तारण की वर्तमान प्रक्रिया में सुधार की तत्काल आवश्यकता है।
बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने इस बात पर चिंता जताई कि दिल्ली में उत्पन्न होने वाले कुल कचरे का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अभी भी स्रोत पर अलग (सेग्रिगेशन) नहीं किया जा रहा है। इसका सीधा परिणाम यह है कि बड़ी मात्रा में कचरा बिना किसी प्रसंस्करण के सीधे डंपसाइट्स तक पहुंच रहा है, जिससे कचरे के पहाड़ों का आकार कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है।
एक जोन में लागू होगा इंदौर मॉडल
कचरा प्रबंधन में सुधार के लिए एलजी ने इंदौर नगर निगम के सफल मॉडल को दिल्ली में अपनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने एमसीडी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शहर के किसी एक जोन में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर तुरंत लागू किया जाए। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य क्षेत्रों में भी विस्तारित किया जाएगा। इंदौर मॉडल अपनी वैज्ञानिक कचरा पृथक्करण और निस्तारण प्रणाली के लिए देश भर में जाना जाता है।
एलजी ने डंपसाइट्स से पुराने कचरे को हटाने की चल रही प्रक्रिया की सराहना की, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि प्रतिदिन निकलने वाले नए कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में कचरे के नए पहाड़ न बन सकें और डंपसाइट्स पर बोझ कम हो।
प्रदूषण और मानसून की तैयारियों पर जोर
बैठक में सर्दियों के दौरान होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने की रणनीति पर भी मंथन किया गया। उपराज्यपाल ने सड़कों की समयबद्ध मरम्मत करने, धूल नियंत्रण के कड़े उपाय अपनाने और एमसीडी के अंतर्गत आने वाली सड़कों का रोड सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सड़कों की स्थिति और धूल का प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मानसून के मद्देनजर जलभराव की समस्या और डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम पर भी विशेष चर्चा हुई। एलजी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाए। नालों की नियमित सफाई और बारिश के दौरान त्वरित जल निकासी सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि नागरिकों को जलभराव के कारण किसी प्रकार की असुविधा न हो।
ट्रैफिक और नागरिक सुविधाओं पर निगरानी
बैठक में टोल प्लाजा के आसपास लगने वाले ट्रैफिक जाम का मुद्दा भी उठा। एलजी ने इस बात पर जोर दिया कि जाम के कारण नागरिकों को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने एमसीडी के कमिश्नर संजीव खिरवार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जमीनी स्तर पर इन सभी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें और नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बनाए रखें।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
