दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों के लिए खुला रास्ता: कैबिनेट ने दी ड्राफ्ट बिल को मंजूरी, अब बनेंगे हाईटेक कैंपस
Delhi government approves private university bill for high-tech campuses. दिल्ली सरकार ने राजधानी में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता साफ कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और निगमित किए जाने संबंधी प्रारूप विधेयक को मंजूरी दे दी गई।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त
दिल्ली सरकार ने राजधानी में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और उनके संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और निगमित किए जाने संबंधी' प्रारूप विधेयक को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस कदम से दिल्ली में विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थानों के आने का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार का मानना है कि यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक होगा। इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली को एक ग्लोबल एजुकेशन हब के रूप में विकसित करना है। इस पहल के माध्यम से राज्य में रिसर्च, इनोवेशन और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की योजना है।
छात्रों के लिए आरक्षण और प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता
प्रस्तावित कानून में दिल्ली के स्थानीय छात्रों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। नए नियमों के अनुसार, निजी विश्वविद्यालयों के प्रत्येक पाठ्यक्रम में दिल्ली के छात्रों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। यह आरक्षण दिल्ली सरकार की मौजूदा आरक्षण नीति के अनुरूप होगा। इसके अलावा, संस्थानों को अपनी प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और भेदभाव रहित रखना अनिवार्य होगा।
शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालयों को परीक्षा प्रणाली और प्रवेश मानकों में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन विश्वविद्यालयों को स्व-वित्तपोषित मॉडल पर काम करना होगा और उन्हें सरकार से कोई नियमित वित्तीय सहायता या अनुदान प्राप्त नहीं होगा।
बहुमंजिला कैंपस और आधुनिक बुनियादी ढांचे को अनुमति
दिल्ली में जमीन की सीमित उपलब्धता को देखते हुए सरकार ने पारंपरिक बड़े परिसरों की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। अब निजी विश्वविद्यालय आधुनिक, बहुमंजिला और हाईटेक शहरी कैंपस विकसित कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए संस्थानों को पर्याप्त बुनियादी ढांचा, आधुनिक छात्र सुविधाएं, उच्च स्तरीय रिसर्च क्षमता और बेहतर प्रशासनिक तंत्र जैसे कड़े मानकों को पूरा करना होगा।
इस नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और उनके ऑफ-कैंपस केंद्रों के लिए भी दिल्ली में अपने केंद्र खोलने के अवसर पैदा होंगे। संस्थानों के प्रस्तावों की गहन जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद, यूजीसी के प्रतिनिधि और वित्त विशेषज्ञ शामिल होंगे।
नियामक प्राधिकरण रखेगा गुणवत्ता पर नजर
निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता पर निगरानी रखने के लिए 'दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज रेगुलेटरी अथॉरिटी' का गठन किया जाएगा। यह प्राधिकरण प्रवेश, परीक्षा, शिक्षण मानकों, रिसर्च आउटपुट और संस्थागत प्रदर्शन की नियमित समीक्षा करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र हितों के साथ कोई समझौता न हो।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस निर्णय को युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर बताया है, जिससे उन्हें अपने ही शहर में विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त हो सकेगी। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह कदम दिल्ली को भारत की 'नॉलेज कैपिटल' बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित होगा।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
