दिल्ली में 'हर घर तिरंगा' अभियान की तैयारी: 15 लाख झंडों का लक्ष्य, स्वयं सहायता समूहों को मिली जिम्मेदारी
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली सरकार हर घर तिरंगा-2026 अभियान को बड़े पैमाने पर मनाने की तैयारी में है। इस बार इस अभियान से दिल्ली के स्वयं सहायता समूहों (SHG) को जोड़ा गया है, जिससे देशभक्ति के साथ-साथ महिलाओं और स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

स्वतंत्रता दिवस 2026 के उपलक्ष्य में दिल्ली सरकार ने 'हर घर तिरंगा' अभियान को व्यापक स्तर पर आयोजित करने की रूपरेखा तैयार कर ली है। इस बार के अभियान का मुख्य उद्देश्य न केवल देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना भी है। सरकार ने इस वर्ष पूरी दिल्ली में 15 लाख से अधिक राष्ट्रीय ध्वज वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता दिल्ली के स्वयं सहायता समूहों (SHG) की सक्रिय भागीदारी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि कुल निर्धारित लक्ष्य में से 2 लाख तिरंगे दिल्ली के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जाएंगे। राज्य शहरी आजीविका मिशन के तहत चिन्हित इन समूहों को झंडे बनाने का काम सौंपकर सरकार ने शहरी गरीबों और महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित किए हैं।
मुख्यमंत्री ने इस पहल पर जोर देते हुए कहा कि 'हर घर तिरंगा' केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का एक माध्यम है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को इस अभियान में शामिल करने से उन्हें न केवल आर्थिक लाभ प्राप्त होगा, बल्कि उन्हें देशव्यापी गौरवपूर्ण अभियान का हिस्सा बनने का अवसर भी मिलेगा।
वितरण और आपूर्ति की रणनीति
15 लाख तिरंगों के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने बहुआयामी रणनीति अपनाई है। जहां 2 लाख झंडे स्थानीय स्वयं सहायता समूहों से खरीदे जा रहे हैं, वहीं शेष झंडों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए ऑनलाइन बाजारों और अन्य अधिकृत स्रोतों का सहारा लिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली के प्रत्येक घर तक तिरंगा पहुंच सके।
प्रशासनिक स्तर पर इस अभियान को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि तिरंगे की गुणवत्ता और गरिमा का पूरा ध्यान रखा जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को झंडों के वितरण और उनके सही रखरखाव के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियानों में स्थानीय समूहों को जोड़ना समावेशी विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है, बल्कि आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी बल मिलता है। दिल्ली सरकार की यह पहल दर्शाती है कि कैसे राष्ट्रीय पर्वों को सामाजिक और आर्थिक सुधारों के साथ जोड़ा जा सकता है।
आने वाले दिनों में सरकार झंडों के वितरण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना साझा कर सकती है। दिल्ली के निवासियों से भी अपील की जा रही है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपने घरों पर तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को यादगार बनाएं।
इस अभियान की सफलता के साथ ही यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि भविष्य में भी इसी तरह के आयोजनों में स्थानीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे दिल्ली के आर्थिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव आ सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!