दतिया में राशन घोटाले का पर्दाफाश: 46 हितग्राहियों का अनाज डकारने वाले विक्रेता पर FIR
Datia ration distribution scam investigation details. दतिया के तगा गांव की शासकीय उचित मूल्य दुकान में राशन वितरण में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि, 46 हितग्राहियों का बायोमेट्रिक सत्यापन कर ऑनलाइन रिकॉर्ड में राशन वितरण दिखा दिया गया।

मुश्ताक अहमद खान
Editor in chief

बायोमेट्रिक का गलत इस्तेमाल कर किया गया फर्जीवाड़ा
दतिया जिले के तगा गांव में स्थित शासकीय उचित मूल्य की दुकान पर राशन वितरण में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। स्थानीय प्रशासन और खाद्य विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ है कि दुकान के विक्रेता ने 46 हितग्राहियों के बायोमेट्रिक सत्यापन का दुरुपयोग कर उन्हें कागजों पर राशन वितरित करना दिखा दिया। हकीकत में इन लोगों को पिछले तीन महीनों से सरकारी अनाज नसीब ही नहीं हुआ।
मामला तब सुर्खियों में आया जब प्रभावित हितग्राहियों ने लगातार राशन न मिलने की शिकायतें कीं। जांच के दौरान पता चला कि मई, जून और जुलाई 2026 के दौरान इन हितग्राहियों के नाम पर राशन का उठाव तो दिखाया गया, लेकिन वह सामग्री उन तक कभी पहुंची ही नहीं। इस गंभीर अनियमितता के बाद खाद्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
लाखों के गबन का खुलासा और कानूनी कार्रवाई
खाद्य विभाग की विस्तृत जांच रिपोर्ट के अनुसार, ई-पॉस पोर्टल पर जून और जुलाई 2026 के आंकड़ों में भारी हेरफेर की गई है। पोर्टल पर कुल 8462 किलो गेहूं, 2098 किलो चावल और 496 किलो नमक का वितरण दर्ज किया गया था। विभाग ने इस पूरी सामग्री की कुल कीमत 3 लाख 26 हजार 720 रुपये आंकी है, जो कि सीधे तौर पर सरकारी खजाने और गरीबों के हक की लूट है।
इस अनियमितता के पुख्ता सबूत मिलने के बाद, खाद्य विभाग ने चिरूला थाना पुलिस को लिखित शिकायत दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर दुकान के विक्रेता नीरज पाल के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अब इस मामले में दस्तावेजों की जांच और गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी कर रही है।
पहले भी हुई थी कार्रवाई, फिर भी जारी रहा खेल
सूत्रों के अनुसार, राशन वितरण में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद पहले भी इस दुकान को निलंबित किया गया था और इसे दूसरी दुकान से संबद्ध कर दिया गया था। हालांकि, दोबारा की गई जांच में फर्जी वितरण का यह बड़ा मामला उजागर हुआ। हितग्राहियों के बयानों और ई-पॉस रिकॉर्ड के मिलान से यह स्पष्ट हो गया कि सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की गई थी।
पुलिस का कहना है कि इस मामले में साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और हितग्राहियों के बयानों को केस का मुख्य आधार बनाया गया है। यह घटना राशन वितरण प्रणाली में व्याप्त खामियों और निगरानी की कमी को भी दर्शाती है, जिससे गरीब वर्ग को समय पर राशन नहीं मिल पा रहा है।
आगे की जांच और प्रशासनिक रुख
फिलहाल, विक्रेता के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या इस घोटाले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या विक्रेता ने अकेले ही इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। जांच अधिकारी का कहना है कि विवेचना के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी तकनीक का दुरुपयोग कर गरीबों का राशन हड़पने की यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि पुलिस की जांच में और कितने बड़े खुलासे सामने आते हैं और प्रभावित हितग्राहियों को न्याय कब तक मिल पाता है।

Editor in chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
