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दरभंगा में बाल श्रम के खिलाफ बड़ा अभियान: 54 पंचायतों को 90 दिनों में 'बाल मुक्त' बनाने का लक्ष्य

जिले के सभी 18 प्रखंडों में तीन-तीन पंचायतों का चयन किया गया है। कुल 54 पंचायतों में 90 दिनों तक विशेष अभियान चलाकर उन्हें बाल मुक्त पंचायत घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

8 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें
दरभंगा में बाल श्रम के खिलाफ बड़ा अभियान: 54 पंचायतों को 90 दिनों में 'बाल मुक्त' बनाने का लक्ष्य
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दरभंगा में बाल श्रम उन्मूलन के लिए विशेष पहल

दरभंगा जिला प्रशासन ने बाल और किशोर श्रम को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। जिलाधिकारी कौशल कुमार के नेतृत्व में जिले के सभी 18 प्रखंडों में एक विशेष अभियान की शुरुआत की गई है। इस पहल के तहत प्रत्येक प्रखंड से तीन-तीन पंचायतों का चयन किया गया है, जिन्हें आगामी 90 दिनों के भीतर 'बाल मुक्त पंचायत' के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

कुल 54 पंचायतों में चलाए जाने वाले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों और किशोरों की पहचान करना है जो दुकानों, प्रतिष्ठानों या घरेलू कार्यों में मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन 90 दिनों के दौरान चयनित क्षेत्रों में सघन जांच की जाएगी ताकि बाल श्रम के मामलों को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

दोषियों पर होगी कानूनी कार्रवाई

जिलाधिकारी ने श्रम प्रवर्तन अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे चयनित पंचायतों में नियमित निरीक्षण करें। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का जोर केवल बच्चों को काम से मुक्त कराने पर ही नहीं, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित करने पर भी है।

इस अभियान के तहत मुक्त कराए गए प्रत्येक बच्चे का नजदीकी सरकारी स्कूल में नामांकन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रखंड विकास अधिकारियों (BDO) को सौंपी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से वंचित न रहे और दोबारा मजदूरी की ओर न लौटे।

सामुदायिक भागीदारी और निगरानी

प्रशासन ने इस अभियान की सफलता के लिए पंचायत स्तरीय टास्क फोर्स को सक्रिय कर दिया है। ये टास्क फोर्स नियमित बैठकें आयोजित करेंगी ताकि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बना रहे और अभियान की प्रगति की समीक्षा की जा सके। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि बाल श्रम एक सामाजिक कुरीति है, जिसे केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही मिटाया जा सकता है।

जिलाधिकारी कौशल कुमार ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे इस अभियान में प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी विभाग और स्थानीय लोग मिलकर प्रयास करें, तो निर्धारित समय सीमा के भीतर इन 54 पंचायतों को बाल श्रम से मुक्त घोषित करने का लक्ष्य निश्चित रूप से हासिल किया जा सकेगा।

चयनित पंचायतों की सूची

अभियान के लिए चयनित प्रमुख पंचायतों में अदलपुर, लोआम, नैनाघाट, अघरा महापरा, पिड़री, टिकापट्टी, मझोलिया, पौराम, पतौर, बनसारा, कोठिया, लालगंज, धनौल, हरहच्चा, बलिगांव, अरौला, गोदाईपट्टी, गौढ़ेला, राढ़ी दक्षिणी, राढ़ी उत्तरी, सहसपुर, कटका, निस्ता, अस्थुआ, लदहो, कमरकला, रोहार महमुदा, पोखरभिंडा, राजा खरवार, ठेंगहा, चनौर, भंडारीसम, जतुका पैकटोल, झगरूआ, झगरूआ तरवाड़ा, नरकटिया भंडरिया, मकरमपुर, सझुआर, हबीभौआर, हरिनगर, भादर, औराही, लटहा तुमौल सुहथ, हनुमाननगर, नरमा नवानगर, बरौम, गौड़ामानसिंह, कसरौर करकौली, पुनहद, गनौन, तुमौल, उसरी, भिण्डुआ और ईटहर शामिल हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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