दबंग दुनिया पब्लिकेशन पर जीएसटी विभाग का शिकंजा: 48 करोड़ की रिकवरी का आदेश, फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप
Dabang Duniya Publication 48 crore GST recovery tax evasion case Indore High Court latest news. विभाग ने आदेश में फर्जी सर्कुलेशन और कथित फर्जी विज्ञापनों के माध्यम से आय दर्शाने का आरोप लगाया है। बताया गया है कि इस आदेश को चुनौती देते हुए कंपनी ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन बाद में याचिका वापस ले ली गई।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

इंदौर स्थित दबंग दुनिया पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड (DDPL) के खिलाफ केंद्रीय जीएसटी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 48 करोड़ रुपये की कर वसूली का आदेश जारी किया है। विभाग के जॉइंट कमिश्नर योगेश पांडुरंग द्वारा पारित इस आदेश में कंपनी पर न केवल भारी-भरकम टैक्स देनदारी तय की गई है, बल्कि 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले ने मीडिया जगत और व्यापारिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
फर्जी सर्कुलेशन और विज्ञापनों का खेल
जीएसटी विभाग की जांच में सामने आया है कि पब्लिकेशन ने अपने अखबार के सर्कुलेशन को वास्तविकता से पांच से आठ गुना अधिक दिखाकर 5.73 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय दर्शाई थी। इसके अतिरिक्त, कथित तौर पर फर्जी विज्ञापनों के माध्यम से 5.93 करोड़ रुपये की आय का सृजन किया गया। इस प्रकार कुल 11.66 करोड़ रुपये की संदिग्ध आय के आधार पर विभाग ने 3.68 करोड़ रुपये जीएसटी, 65 लाख रुपये सेस और 44.50 करोड़ रुपये सेस-2 की देनदारी निर्धारित की है।
यह पूरी कार्रवाई केंद्रीय एवं राज्य जीएसटी अधिनियम की धारा 122(2)(बी) और राज्यों को क्षतिपूर्ति अधिनियम-2017 की धारा 11 के तहत की गई है। विभाग का आरोप है कि कंपनी ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी वित्तीय स्थिति को गलत तरीके से पेश किया।
अन्य कंपनियों से संबंध और कर्मचारियों की भूमिका
आदेश में यह भी दावा किया गया है कि दबंग दुनिया पब्लिकेशन और ईटीसीएल (ऐलोरा टोबेको) के बीच गहरे कारोबारी संबंध थे। विभाग का मानना है कि दोनों संस्थाएं एक ही नियंत्रण में संचालित हो रही थीं। आरोप है कि डीडीपीएल का इस्तेमाल ऐलोरा टोबेको की व्यावसायिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने और आय को छिपाने के लिए किया गया था।
जांच में यह भी पाया गया कि अखबार के कर्मचारियों और रिपोर्टरों के नाम पर फर्जी कंपनियां चलाई जा रही थीं। विभाग ने उल्लेख किया है कि एक क्राइम रिपोर्टर के नाम पर फर्म का संचालन, एक कर्मचारी को दूसरी कंपनी में डायरेक्टर बनाना और प्रेस कार्ड का अन्य व्यावसायिक कार्यों में दुरुपयोग किया गया। संस्थान ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि कर्मचारियों के व्यक्तिगत कृत्यों के लिए संस्थान जिम्मेदार नहीं है, लेकिन जीएसटी विभाग ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।
कानूनी प्रक्रिया और लंबित देनदारियां
इस आदेश को चुनौती देने के लिए कंपनी ने इंदौर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया, जिसके चलते कोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी। यह कार्रवाई किशोर वाधवानी और उनसे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही व्यापक जांच का हिस्सा है।
जीएसटी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वाधवानी और संबंधित पक्षों पर पहले से ही लगभग 1,946 करोड़ रुपये की कर मांग लंबित है, जिसमें 151.54 करोड़ रुपये जीएसटी और 1,794.54 करोड़ रुपये सेस शामिल है। वर्तमान में 48 करोड़ रुपये की यह रिकवरी इसी लंबी फेहरिस्त का एक हिस्सा है, जो कंपनी की वित्तीय और कानूनी मुश्किलों को और अधिक बढ़ाती नजर आ रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
