राजनीतिक दल नहीं बनेगा CJP, अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया भविष्य का एजेंडा
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा कि फिलहाल CJP राजनीतिक पार्टी नहीं बनेगी। उन्होंने कहा- अभी भारत को एक मजबूत प्रेशर ग्रुप की जरूरत है, इसलिए CJP फिलहाल उसी भूमिका में काम करेगी।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजनीतिक पार्टी के बजाय प्रेशर ग्रुप के रूप में काम करेगी CJP
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि उनका संगठन फिलहाल कोई राजनीतिक दल नहीं बनेगा। छत्रपति संभाजीनगर में मीडिया से बातचीत करते हुए दीपके ने कहा कि देश को इस समय एक नई राजनीतिक पार्टी की नहीं, बल्कि एक मजबूत जन आंदोलन और प्रभावी प्रेशर ग्रुप की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि वे इसे राजनीतिक दल का रूप देते, तो उनका आंदोलन अपनी प्रभावशीलता खो देता।
दीपके के अनुसार, CJP की सफलता का मुख्य कारण यह रहा कि इसमें विभिन्न विचारधाराओं और राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोग लोकतंत्र को बचाने के उद्देश्य से एकजुट हुए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं, जैसे न्यायपालिका, मीडिया और चुनाव आयोग के प्रति जनता का भरोसा कम हुआ है, जिसे बहाल करने के लिए जनता के दबाव की जरूरत है।
छत्रपति संभाजीनगर में दो दिवसीय मंथन
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में CJP की दो दिवसीय कोर कमेटी की बैठक शुरू हो चुकी है। इस बैठक में अभिजीत दीपके और प्रवक्ता सौरव दास सहित संगठन के 13 प्रमुख सदस्य शामिल हैं। बैठक का मुख्य एजेंडा जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन की समीक्षा करना, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की रणनीति तैयार करना है।
संगठन ने यह भी घोषणा की है कि वे झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ खड़े होंगे और उनकी मांगों का समर्थन करेंगे। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने जानकारी दी कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज की गई एफआईआर को वापस कराने के लिए सरकार के साथ बातचीत जारी है। इसके अलावा, घायल प्रदर्शनकारियों को कानूनी और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी चल रही है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और कानूनी सहायता
CJP का उदय सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश द्वारा युवाओं के लिए की गई एक टिप्पणी के बाद हुआ था, जिसे अभिजीत दीपके ने एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान में बदल दिया। यह अभियान देखते ही देखते नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ एक बड़े छात्र आंदोलन में परिवर्तित हो गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले इस धरने में हजारों छात्र और अभिभावक शामिल हुए थे।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक लीगल डिफेंस फंड भी बनाया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस फंड में 1 करोड़ रुपये का योगदान देने की घोषणा की है। CJP का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के संपर्क में हैं ताकि छात्रों को भविष्य में किसी भी कानूनी परेशानी से बचाया जा सके।
भविष्य की राह
अभिजीत दीपके, जो खुद एक डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं और वर्तमान में अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, ने स्पष्ट किया है कि संगठन समय-समय पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जैसे विशेषज्ञों से सलाह लेता रहेगा। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद धरना समाप्त करने वाली CJP अब एक संगठित प्रेशर ग्रुप के रूप में अपनी भूमिका को और अधिक विस्तार देने की तैयारी में है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
