चित्रकूट: माटीकला कारीगरों के लिए आधुनिक मशीनों का रास्ता साफ, 36 लाभार्थियों का चयन
Chitrakoot Matikala artisans selected for free electric pottery wheels and pugmill machines distribution. उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड की योजना के तहत निःशुल्क विद्युत चालित चाक और पगमिल मशीनों के वितरण के लिए चयन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कुम्हारों और माटीकला से जुड़े शिल्पकारों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन क्षमता और आय में वृद्धि करना है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

आधुनिक तकनीक से लैस होंगे चित्रकूट के कुम्हार
चित्रकूट में पारंपरिक हस्तशिल्प और माटीकला से जुड़े कारीगरों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत जिले के पात्र शिल्पकारों को अब आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल कारीगरों की मेहनत को कम करना है, बल्कि उनकी उत्पादन क्षमता और आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि करना है। लंबे समय से चली आ रही चयन प्रक्रिया को अब अंतिम रूप दे दिया गया है।
विकास भवन के सभागार में आयोजित एक विशेष बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी डी.पी. पाल की अध्यक्षता में गठित चयन समिति ने आवेदकों का साक्षात्कार लिया। इस प्रक्रिया के माध्यम से उन कारीगरों को चुना गया है जो वास्तव में इस सहायता के हकदार हैं। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी संतोष कुमार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए चित्रकूट जनपद को कुल 30 विद्युत चालित चाक और 6 पगमिल मशीनों का लक्ष्य आवंटित किया गया था, जिसे अब पूरा कर लिया गया है।
पारदर्शिता के साथ हुआ लाभार्थियों का चयन
इस योजना के लिए जिले भर से कुल 57 कारीगरों ने ऑनलाइन माध्यम से आवेदन किया था। चयन समिति ने सभी आवेदनों की गहन जांच की और उसके बाद साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की। चयन के दौरान कारीगरों के अनुभव, उनके काम की गुणवत्ता और योजना के निर्धारित मानकों को प्राथमिकता दी गई। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए समिति ने हर पहलू पर बारीकी से विचार किया ताकि सही लाभार्थियों तक सरकारी सहायता पहुंच सके।
साक्षात्कार के उपरांत 30 लाभार्थियों को विद्युत चालित चाक और 6 लाभार्थियों को पगमिल मशीनें देने के लिए अंतिम सूची तैयार कर ली गई है। इन मशीनों के मिलने से कारीगरों के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव आएगा। विद्युत चालित चाक न केवल शारीरिक श्रम को कम करेगा, बल्कि कम समय में अधिक और बेहतर फिनिशिंग वाले बर्तन बनाने में भी मदद करेगा। वहीं, पगमिल मशीन मिट्टी को तैयार करने की प्रक्रिया को बेहद सरल और तेज बना देगी।
स्वरोजगार और पारंपरिक व्यवसाय को मिलेगा बढ़ावा
जिला ग्रामोद्योग विभाग का मानना है कि आधुनिक उपकरणों के आने से माटीकला से जुड़े पारंपरिक व्यवसाय को एक नई ऊर्जा मिलेगी। मिट्टी तैयार करने में होने वाली मेहनत और समय की बचत होने से कारीगर अपने उत्पादों की विविधता और गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दे पाएंगे। यह पहल न केवल मौजूदा कारीगरों के लिए फायदेमंद है, बल्कि स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी सहायक सिद्ध होगी।
विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चयनित लाभार्थियों को जल्द ही मशीनों का वितरण किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इस योजना के माध्यम से सरकार का प्रयास है कि माटीकला जैसे कुटीर उद्योगों को आधुनिक युग की जरूरतों के अनुरूप ढालकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाए। चित्रकूट के कुम्हारों के लिए यह एक बड़ा अवसर है जो उनके जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
भविष्य की संभावनाएं
आने वाले समय में इन मशीनों के उपयोग से स्थानीय बाजार में मिट्टी के बर्तनों और सजावटी सामानों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। जब कारीगर आधुनिक तकनीक का उपयोग करेंगे, तो उनके उत्पादों की बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता भी बढ़ेगी। जिला प्रशासन और माटीकला बोर्ड इस बात पर जोर दे रहे हैं कि कारीगरों को न केवल मशीनें दी जाएं, बल्कि उन्हें समय-समय पर तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाए ताकि वे अपने कौशल को और निखार सकें।
इस पूरी प्रक्रिया के सफल समापन के बाद अब कारीगरों को मशीनों के मिलने का बेसब्री से इंतजार है। विभाग ने आश्वासन दिया है कि वितरण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी नहीं की जाएगी। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पारंपरिक कला को संरक्षित करने के सरकार के संकल्प को दर्शाती है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
