छतरपुर: 18 घंटे काम से परेशान रसोइयों ने प्रशासन से लगाई गुहार, कार्य समय तय करने की मांग
छतरपुर हलवाई मजदूर विकास उत्थान संगठन के बैनर तले श्रमिकों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कार्य के निश्चित घंटे तय करने, समय पर मेहनताना दिलाने और श्रमिकों के शोषण पर रोक लगाने की मांग की। संगठन के अध्यक्ष दयाराम कुशवाहा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले हलवाई और रसोइयों से सुबह 9 बजे से लेकर देर रात 2 से 4 बजे तक लगातार काम कराया

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में हलवाई, रसोइयों और उनके सहयोगी श्रमिकों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए जिला प्रशासन से गुहार लगाई है। छतरपुर हलवाई मजदूर विकास उत्थान संगठन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में श्रमिकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया और जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। इन श्रमिकों का कहना है कि लंबे समय से वे शोषण का शिकार हो रहे हैं और अब उनके पास प्रशासन की मदद लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
15 से 18 घंटे की ड्यूटी से श्रमिकों का बुरा हाल
संगठन के अध्यक्ष दयाराम कुशवाहा ने बताया कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले इन श्रमिकों को शादी-विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों के दौरान अमानवीय परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रमिकों से सुबह 9 बजे से लेकर देर रात 2 से 4 बजे तक लगातार काम लिया जाता है। इस तरह रोजाना 15 से 18 घंटे की ड्यूटी के कारण न केवल उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, बल्कि उनके पारिवारिक जीवन पर भी इसका गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
श्रमिकों का कहना है कि बिना किसी निश्चित समय सीमा के काम करने से वे शारीरिक और मानसिक रूप से थक चुके हैं। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और आयोजनों में हलवाई एवं रसोइयों के कार्य की अधिकतम समय सीमा रात 12 बजे तक निर्धारित करनी चाहिए ताकि उन्हें कुछ आराम मिल सके।
मेहनताना भुगतान में देरी और शोषण का मुद्दा
ज्ञापन में केवल काम के घंटों का ही नहीं, बल्कि पारिश्रमिक के भुगतान में होने वाली अनियमितताओं का भी जिक्र किया गया है। श्रमिकों ने शिकायत की है कि कई बार आयोजनों के बाद उनका मेहनताना समय पर नहीं दिया जाता या फिर भुगतान को बेवजह रोक लिया जाता है। इस आर्थिक शोषण से बचने के लिए उन्होंने प्रशासन से एक ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिससे शिकायत दर्ज होते ही त्वरित कार्रवाई हो सके और श्रमिकों को उनका हक मिल सके।
संगठन के सचिव पुष्पेंद्र कुशवाहा ने इस बात पर जोर दिया कि अन्य क्षेत्रों के श्रमिकों की तरह हलवाई और रसोइयों के लिए भी श्रम कानून स्पष्ट होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक कार्य समय, भुगतान और श्रम अधिकारों से जुड़े नियम तय नहीं होंगे, तब तक असंगठित क्षेत्र के हजारों श्रमिकों का शोषण जारी रहेगा।
निगरानी तंत्र और भविष्य की उम्मीदें
श्रमिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि हलवाई और रसोइयों के हितों की सुरक्षा के लिए एक अलग निगरानी तंत्र बनाया जाए। यह तंत्र न केवल उनके कार्यस्थल पर होने वाले शोषण पर नजर रखेगा, बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि उन्हें सम्मानजनक कार्य वातावरण मिले। श्रमिकों का मानना है कि यदि प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाता है, तो उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।
फिलहाल, जिला प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार कर लिया है और श्रमिकों को उचित जांच व कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए क्या नीतिगत बदलाव करता है। श्रमिकों को उम्मीद है कि उनके संघर्ष का सकारात्मक परिणाम निकलेगा और उन्हें भविष्य में 18 घंटे की गुलामी से मुक्ति मिलेगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!