SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा
Supreme Court SC ST reservation creamy layer exclusion policy news. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में क्रीमी लेयर का नियम लागू नहीं होता। सरकार ने उन जनहित याचिकाओं का विरोध किया है, जिनमें SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने और सरकारी नौकरियों में आय के आधार पर आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग की गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

SC-ST आरक्षण पर केंद्र का स्पष्ट रुख
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' का सिद्धांत लागू नहीं होता है। सरकार ने उन जनहित याचिकाओं का कड़ा विरोध किया है, जिनमें यह मांग की गई थी कि SC-ST वर्ग के संपन्न परिवारों को आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाए और सरकारी नौकरियों में आय के आधार पर बदलाव किए जाएं।
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि वर्तमान कानूनी ढांचे में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो SC-ST समुदायों पर क्रीमी लेयर की अवधारणा को लागू करता हो। केंद्र के अनुसार, यह सिद्धांत विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) के लिए तैयार किया गया है। सरकार ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं ने किसी भी मौलिक अधिकार के उल्लंघन का ठोस आधार पेश नहीं किया है।
संसद के अधिकार और संवैधानिक स्थिति
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि SC और ST की सूची में किसी भी प्रकार का संशोधन करने का अनन्य अधिकार केवल संसद के पास है। संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 का हवाला देते हुए केंद्र ने कहा कि किसी भी जाति या जनजाति को आरक्षण सूची में शामिल करने या हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से विधायी दायरे में आती है। सरकार ने इंदिरा साहनी मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि SC-ST की पहचान ऐतिहासिक, सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन पर आधारित है, न कि केवल आर्थिक स्थिति पर।
याचिकाकर्ताओं ने अपनी मांग में तर्क दिया था कि जो परिवार पहले ही संवैधानिक या उच्च सरकारी पदों पर पहुंच चुके हैं, उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए ताकि इसका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंदों तक पहुंच सके। हालांकि, केंद्र ने इस दलील को स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत बताया है।
कल्याणकारी योजनाओं और आय सीमा पर सरकार का तर्क
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि SC, ST और SEBC के लिए संचालित अधिकांश कल्याणकारी योजनाओं में पहले से ही आय सीमा का निर्धारण किया गया है, ताकि संसाधनों का वितरण जरूरतमंदों के बीच सुनिश्चित हो सके। सरकार ने याचिकाकर्ताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन विशिष्ट योजनाओं में बदलाव की आवश्यकता है और इससे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को वास्तविक लाभ कैसे मिलेगा।
यह मामला पिछले वर्ष अगस्त में रमाशंकर प्रजापति और अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं के बाद चर्चा में आया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, जिस पर अब केंद्र ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है।
न्यायिक टिप्पणियों का संदर्भ
यह बहस तब और तेज हो गई थी जब सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने OBC आरक्षण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया था कि क्या उच्च पदों पर आसीन माता-पिता के बच्चों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने टिप्पणी की थी कि जब शिक्षा और आर्थिक उन्नति से सामाजिक स्थिति में सुधार हो जाता है, तो अगली पीढ़ी के लिए आरक्षण की निरंतरता पर विचार किया जाना चाहिए।
हालांकि, केंद्र सरकार का ताजा हलफनामा इस चर्चा को एक नया मोड़ देता है, जहां सरकार ने SC-ST वर्ग के लिए क्रीमी लेयर के सिद्धांत को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इन याचिकाओं पर आगे क्या रुख अपनाता है और कानूनी बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
