बक्सर में स्वास्थ्य व्यवस्था की शर्मनाक तस्वीर: लकवाग्रस्त पत्नी को ठेले पर 27 किमी खींचने को मजबूर हुआ बुजुर्ग
Buxar healthcare system controversy elderly man transports paralyzed wife on handcart. बक्सर जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक वृद्ध अपनी लकवाग्रस्त पत्नी को ठेले पर लादकर लगभग 27 किलोमीटर पैदल चला। यह घटना डुमरांव से बक्सर सदर अस्पताल तक की है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती घटना
बिहार के बक्सर जिले से एक अत्यंत विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जिसने राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक बुजुर्ग व्यक्ति को अपनी लकवाग्रस्त पत्नी को इलाज के लिए करीब 27 किलोमीटर दूर ठेले पर लादकर ले जाना पड़ा। इस हृदयविदारक दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बुजुर्ग अपनी पत्नी को एक पुराने ठेले पर बैठाकर बक्सर सदर अस्पताल की ओर ले जा रहा है। इस दौरान जब एक राहगीर ने उनसे पूछताछ की, तो बुजुर्ग ने अपनी विवशता बयां की। उन्होंने बताया कि उन्हें लगा था कि एंबुलेंस या किसी अन्य वाहन की सेवा लेने पर उन्हें भारी शुल्क देना पड़ेगा, जिसे वहन करने की उनकी आर्थिक स्थिति नहीं थी। इसी डर और जानकारी के अभाव में उन्होंने अपनी बीमार पत्नी को ठेले पर ही ले जाना उचित समझा।
जागरूकता का अभाव और सरकारी दावों की सच्चाई
पूछताछ के दौरान जब राहगीर ने बुजुर्ग को बताया कि सरकारी एंबुलेंस सेवा पूरी तरह से नि:शुल्क है, तो बुजुर्ग के चेहरे पर हैरानी और असमंजस साफ झलक रहा था। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए जो प्रचार-प्रसार होना चाहिए, वह जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल रहा है। एक गरीब व्यक्ति का अपनी पत्नी को इतनी लंबी दूरी तक ठेले पर ढोना यह साबित करता है कि स्वास्थ्य विभाग की पहुंच आम आदमी तक नहीं है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग की पत्नी का नाम उगना देवी है, जो लकवा से ग्रसित हैं। उन्हें पहले कोरानसराय के एक स्थानीय अस्पताल में दिखाया गया था, जहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए डुमरांव रेफर किया गया। डुमरांव से उन्हें बक्सर सदर अस्पताल जाने की सलाह दी गई थी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें एंबुलेंस की सुविधा क्यों नहीं मिली, यह एक बड़ा रहस्य बना हुआ है।
अस्पताल प्रशासन की चुप्पी और अनसुलझे सवाल
इस घटना के बाद से बक्सर सदर अस्पताल प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। अस्पताल के रिकॉर्ड में मरीज के पहुंचने की कोई आधिकारिक सूचना दर्ज नहीं है। इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद बुजुर्ग अपनी पत्नी को लेकर किसी अन्य निजी अस्पताल की ओर गए होंगे या फिर अस्पताल पहुंचने से पहले ही वे कहीं और चले गए। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह वीडियो किस दिन का है और क्या उन्हें किसी अस्पताल से आधिकारिक रूप से रेफर किया गया था।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह घटना न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे एक गरीब परिवार जानकारी के अभाव में अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर है। यदि समय रहते एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गई होती, तो बुजुर्ग को यह कठिन सफर ठेले पर तय नहीं करना पड़ता।
सुधार की दरकार
यह घटना बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर जोर देती है। केवल कागजों पर योजनाएं बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन योजनाओं को अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाना अनिवार्य है। ग्रामीण इलाकों में एंबुलेंस की उपलब्धता और उसके नि:शुल्क होने की जानकारी हर गरीब परिवार तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य को इस तरह की अमानवीय स्थिति का सामना न करना पड़े।
फिलहाल, इस वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासन की काफी आलोचना हो रही है। लोग मांग कर रहे हैं कि इस मामले की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि स्वास्थ्य व्यवस्था में कहां चूक हुई। क्या बुजुर्ग को अस्पताल से एंबुलेंस देने से मना किया गया था या उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं दी गई थी, इन सवालों के जवाब मिलने अभी बाकी हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
