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बिजनौर: पॉक्सो मामले में 15 दिन में आया फैसला, आरोपी को 4 साल की कैद

बिजनौर में पॉक्सो एक्ट के एक मामले में बिजनौर की अदालत ने त्वरित सुनवाई करते हुए आरोपी को महज 15 दिनों के भीतर दोषी करार दिया है। शुक्रवार शाम को स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट की अदालत ने आरोपी दानिश को 4 साल कैद और 21 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

31 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
बिजनौर: पॉक्सो मामले में 15 दिन में आया फैसला, आरोपी को 4 साल की कैद
मूल स्रोत

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में न्यायपालिका ने त्वरित कार्रवाई का एक बड़ा उदाहरण पेश किया है। नजीबाबाद थाना क्षेत्र में सामने आए नाबालिग से छेड़छाड़ के मामले में अदालत ने महज 15 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। इस फैसले ने क्षेत्र में कानून व्यवस्था और त्वरित न्याय की प्रक्रिया को लेकर चर्चाओं को जन्म दिया है।

क्या था पूरा मामला

घटना की शुरुआत 16 जुलाई 2026 को हुई थी, जब नजीबाबाद थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई गई। पीड़िता की मां द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस की गहन जांच और साक्ष्यों के संकलन के दौरान ग्राम किशनपुर आवंला निवासी दानिश पुत्र मुन्ने का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और 18 जुलाई को आरोपी दानिश को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने अपनी विवेचना पूरी करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया, जिससे मामले में कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकी।

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी

इस मामले में मिली सफलता के पीछे जनपद पुलिस के 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पुलिस की मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग ने न्यायालय में मामले की प्रभावी पैरवी की, जिससे सुनवाई में किसी भी प्रकार की देरी नहीं हुई। सरकारी पक्ष ने अदालत के समक्ष ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसके कारण आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध करना आसान हो गया।

शुक्रवार की शाम को स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट की अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी दानिश को दोषी करार दिया। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 और पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 के तहत उसे सजा सुनाई है। इस फैसले के तहत आरोपी को चार वर्ष के कठोर कारावास और 21 हजार रुपये के जुर्माने का दंड दिया गया है।

न्यायिक प्रक्रिया और संदेश

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के त्वरित फैसले न केवल पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने में सहायक होते हैं, बल्कि समाज में अपराधियों के बीच एक कड़ा संदेश भी भेजते हैं। 15 दिनों के भीतर सजा का ऐलान यह दर्शाता है कि यदि पुलिस और अभियोजन पक्ष मिलकर काम करें, तो न्याय की प्रक्रिया को काफी गति दी जा सकती है।

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए उनका यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। भविष्य में भी इसी तरह से मॉनिटरिंग सेल के माध्यम से मामलों की पैरवी की जाएगी ताकि अपराधियों को कानून के दायरे में लाकर कड़ी सजा दिलाई जा सके।

इस मामले के निस्तारण के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली की सराहना की जा रही है। नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों में इस प्रकार की त्वरित कार्रवाई से न्याय व्यवस्था में आम जनता का भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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