बिहार: मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी बचाने के लिए MLC देवेश कुमार ने दिया इस्तीफा
Bihar MLC Devesh Kumar resigns from post for Minister Deepak Prakash. बीजेपी के MLC देवेश कुमार ने इस्तीफे की पेशकश की है। उन्होंने बीजेपी प्रदेश अध्य्क्ष को अपना इस्तीफा भेजा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मंत्री पद बचाने की कवायद: देवेश कुमार ने छोड़ी विधान परिषद की सदस्यता
बिहार की राजनीति में मंत्री दीपक प्रकाश की सदस्यता को लेकर चल रहे संवैधानिक विवाद के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बीजेपी के विधान पार्षद (MLC) देवेश कुमार ने अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे को सीधे तौर पर मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है, ताकि वे अपनी मंत्री पद की कुर्सी बचा सकें।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, सभापति अवधेश नारायण सिंह और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में यह इस्तीफा सभापति को सौंपा गया। सूत्रों के अनुसार, देवेश कुमार ने बेहद गोपनीय तरीके से विधान परिषद पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंपा और तुरंत वहां से निकल गए। देवेश कुमार 2021 में राज्यपाल कोटे से मनोनीत हुए थे और उनका कार्यकाल अगले साल समाप्त होने वाला था।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और संवैधानिक पेंच
यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रही एक याचिका के बाद गरमाया है। शीर्ष अदालत ने हाल ही में सुनवाई के दौरान सरकार से तीखा सवाल किया था कि बिना किसी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) के सदस्य बने दीपक प्रकाश मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि दीपक प्रकाश ने संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
याचिकाकर्ता के वकील सुदीप चंद्र के अनुसार, दीपक प्रकाश को नवंबर 2025 में पहली बार मंत्री बनाया गया था। इसके बाद अप्रैल 2026 में सरकार बदलने पर उन्हें फिर से मंत्री बनाया गया। याचिका में तर्क दिया गया है कि कोई भी व्यक्ति बिना सदन का सदस्य बने केवल छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है, और इस अवधि को बार-बार पुनर्गठन के जरिए नहीं बढ़ाया जा सकता।
अनुच्छेद 164(4) की व्याख्या और कानूनी चुनौती
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164(4) स्पष्ट करता है कि गैर-विधायक व्यक्ति को मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन उसे छह महीने के भीतर सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2001 के 'एस.आर. चौधरी बनाम पंजाब राज्य' मामले का हवाला दिया गया है। उस फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया था कि सरकारें मुख्यमंत्री बदलकर या इस्तीफा दिलाकर किसी व्यक्ति को बार-बार छह महीने की छूट का लाभ नहीं दे सकतीं।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि दीपक प्रकाश द्वारा मंत्री रहते हुए लिए गए सभी निर्णयों और संकल्पों को निरस्त किया जाए। साथ ही, उनके वेतन और भत्तों की भी जांच की मांग की गई है। अदालत ने इस मामले में सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
आगे क्या होगा?
देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद अब यह सीट खाली हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी अब इस सीट पर दीपक प्रकाश को नामित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई और याचिकाकर्ता के कड़े तर्कों के बीच सरकार के लिए यह कदम कानूनी रूप से कितना प्रभावी होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो पाएगा।
फिलहाल, बिहार सरकार और एनडीए खेमा इस मामले में बचाव की मुद्रा में है। उनका तर्क है कि नई सरकार के गठन के साथ ही दीपक प्रकाश का कार्यकाल फिर से शुरू हुआ है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने इस दलील पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
