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भुटकुन शुक्ला हत्याकांड: 29 साल बाद आया फैसला, पूर्व विधायक के भाई के हत्यारे को उम्रकैद

मृतक भुटकुन लालगंज के पूर्व विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला का भाई है। जिसकी हत्या 16 जुलाई 1997 को वैशाली के लालगंज थाना क्षेत्र के खंजाहाचक गांव में हुई थी।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

30 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
भुटकुन शुक्ला हत्याकांड: 29 साल बाद आया फैसला, पूर्व विधायक के भाई के हत्यारे को उम्रकैद
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29 साल पुराने हत्याकांड में न्याय की प्रतीक्षा समाप्त

बिहार के वैशाली जिले को दहला देने वाले चर्चित भुटकुन शुक्ला हत्याकांड में करीब तीन दशक बाद न्यायपालिका ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। मुजफ्फरपुर जिला एवं सत्र न्यायालय (दशम) के न्यायाधीश सर्वेश कुमार मिश्रा ने इस मामले में दोषी दीपक सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला 16 जुलाई 1997 का है, जब लालगंज के पूर्व विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला के भाई भुटकुन शुक्ला की उनके पैतृक आवास खंजाहाचक गांव में निर्मम हत्या कर दी गई थी।

दीपक सिंह, जिसे अदालत ने दोषी करार दिया है, कभी भुटकुन शुक्ला का बेहद करीबी और उनका अंगरक्षक हुआ करता था। मुजफ्फरपुर के पारू थाना क्षेत्र का रहने वाला दीपक इस हत्याकांड के बाद से ही कानून की नजरों से बचता रहा था। इतने लंबे समय तक चले कानूनी संघर्ष के बाद अब जाकर पीड़ित परिवार को न्याय मिला है।

दोषी का लंबा आपराधिक इतिहास

दीपक सिंह केवल भुटकुन शुक्ला हत्याकांड तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उसका आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा और खौफनाक रहा है। उस पर 14 साल पुराने एक अन्य चर्चित मामले में भी संलिप्तता का आरोप था, जिसमें उसने पारू स्थित उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक के तत्कालीन प्रबंधक लाल बहादुर सिंह की हत्या कर दी थी। उस मामले में उसने बैंक मैनेजर की हत्या के बाद शव को कैश केबिन में गमछे के फंदे से लटका दिया था, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।

बैंक प्रबंधक हत्याकांड के बाद दीपक सिंह पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था और अदालत ने उसकी संपत्ति कुर्की का आदेश भी दिया था। अंततः बिहार एसटीएफ की टीम ने उसे उत्तर प्रदेश के वाराणसी से गिरफ्तार किया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, दीपक सिंह भुटकुन शुक्ला गिरोह का एक सक्रिय शार्प शूटर था, जिसका प्रभाव मुजफ्फरपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण और सीतामढ़ी जैसे कई जिलों में फैला हुआ था।

मुन्ना शुक्ला की वर्तमान स्थिति

इस मामले के केंद्र में रहे पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला स्वयं भी वर्तमान में कानूनी पेचीदगियों और जेल की सजा का सामना कर रहे हैं। अक्टूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पूर्व मंत्री बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड में मुन्ना शुक्ला की दोषमुक्ति को पलट दिया था। शीर्ष अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई, जिसके बाद उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था और फिलहाल वे जेल में बंद हैं।

भुटकुन शुक्ला की हत्या के मामले में दीपक सिंह को मिली यह सजा बिहार के आपराधिक इतिहास के एक पुराने अध्याय को बंद करने वाली मानी जा रही है। हालांकि 29 साल का लंबा समय बीत जाने के बाद आए इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि कानून की प्रक्रिया भले ही धीमी हो, लेकिन अंततः दोषियों तक पहुंच ही जाती है।

कानूनी प्रक्रिया और भविष्य की दिशा

अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के बाद अब इस मामले में कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। दीपक सिंह के खिलाफ दर्ज अन्य मामलों और उसकी आपराधिक गतिविधियों की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लिए भी यह एक बड़ी राहत है कि इतने पुराने और संवेदनशील मामले का निस्तारण हो सका है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर बिहार में 90 के दशक के दौर और उस समय की आपराधिक घटनाओं की यादें ताजा कर दी हैं। भुटकुन शुक्ला हत्याकांड जैसे मामलों ने लंबे समय तक वैशाली और मुजफ्फरपुर की राजनीति और कानून-व्यवस्था को प्रभावित किया था। अब इस फैसले के बाद क्षेत्र के लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस सजा से क्षेत्र में अपराध के प्रति डर का माहौल कायम हो पाएगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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