भोपाल में रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर निगम की कार्रवाई ठंडे बस्ते में

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

कार्रवाई को लेकर नगर निगम के बदले सुर
भोपाल में रिहायशी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की प्रस्तावित कार्रवाई एक बार फिर अधर में लटक गई है। निगम प्रशासन ने शहर के विभिन्न इलाकों में करीब 7,512 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे, जिनमें से लगभग 750 प्रतिष्ठानों की समय सीमा 15 अगस्त के बाद समाप्त हो चुकी है। नियमानुसार इन पर सीलिंग की कार्रवाई होनी थी, लेकिन अब तक निगम ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इतना ही नहीं, निगम ने नए नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर भी फिलहाल रोक लगा दी है।
नगर निगम के अधिकारियों का रुख इस पूरे मामले में लगातार बदलता रहा है। कुछ समय पहले निगम ने दावा किया था कि सभी 62,500 व्यावसायिक संपत्तियों को नोटिस दिए बिना सीलिंग की प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी। इसके बाद यह कहा गया कि 15 अगस्त के बाद जिनकी नोटिस अवधि पूरी हो जाएगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सील किया जाएगा। हालांकि, 20 अगस्त के बाद से ही स्थिति स्पष्ट नहीं है और सीलिंग के आदेश जारी करने की प्रक्रिया फाइलों में ही दबी हुई है।
व्यापारियों का विरोध और निगम की दुविधा
कार्रवाई के विरोध में शहर के न्यू मार्केट, बागसेवनिया, अवधपुरी और आनंद नगर जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों के व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों का तर्क है कि त्योहारों का सीजन नजदीक है, ऐसे में उन्हें कुछ समय की मोहलत दी जानी चाहिए। इससे पहले जब निगम ने 101 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए थे, तब 99 दुकानदारों ने खुद ही ताले लगा लिए थे, लेकिन 48 घंटे के भीतर ही वे सभी प्रतिष्ठान फिर से खुल गए। इस घटना ने निगम की कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दूसरी ओर, अरेरा कॉलोनी जैसे रिहायशी इलाकों के स्थानीय निवासी लगातार इस बात का विरोध कर रहे हैं कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां न चलें। निवासियों का कहना है कि इससे यातायात और शांति व्यवस्था प्रभावित होती है। निवासियों के दबाव और व्यापारियों के विरोध के बीच नगर निगम प्रशासन फिलहाल किसी भी स्पष्ट निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ नजर आ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन चुनौती
इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को कार्रवाई के लिए फ्री हैंड दिया है। निगम को 15 सितंबर तक इस मामले में पूरी रिपोर्ट अदालत में पेश करनी है। निगम के उपायुक्त भुवन गुप्ता का कहना है कि अभी व्यापारियों द्वारा दिए गए जवाबों और ज्ञापनों की जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 19 अगस्त तक जारी किए गए नोटिसों की मियाद 29-30 अगस्त तक पूरी हो जाएगी, लेकिन सीलिंग की सटीक तारीख बता पाना अभी संभव नहीं है।
नगर निगम के भीतर चल रही प्रशासनिक सुस्ती के कारण अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या 15 सितंबर की डेडलाइन तक निगम अपनी रिपोर्ट तैयार कर पाएगा। विधानसभा क्षेत्रवार अपर आयुक्तों को आदेश जारी करने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन 24 अगस्त तक भी ये आदेश धरातल पर नहीं उतर सके। ऐसे में निगम की कार्यप्रणाली पर न केवल व्यापारियों बल्कि स्थानीय निवासियों का भी अविश्वास बढ़ता जा रहा है।
आगे की राह और अनिश्चितता
फिलहाल, नगर निगम ने नए नोटिस जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह रोक दिया है। निगम का पूरा ध्यान अब प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण पर है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यदि व्यापारी अपनी आपत्तियों में संतुष्ट नहीं कर पाते हैं, तो सीलिंग की कार्रवाई कब से शुरू होगी। त्योहारों के मद्देनजर निगम किसी भी बड़े विवाद से बचने की कोशिश में है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दबाव के कारण निगम को जल्द ही कोई कड़ा फैसला लेना पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर निगम किस तरह से रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को विनियमित करता है। क्या निगम प्रशासन व्यापारियों को राहत देगा या फिर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सीलिंग की कार्रवाई को अंजाम देगा, यह अभी भविष्य के गर्भ में है। फिलहाल, शहर के हजारों दुकानदार और स्थानीय निवासी निगम के अगले आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!