भोपाल: आवासीय इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर निगम का चला बुलडोजर, 15 से ज्यादा सील
Bhopal residential property commercial activity crackdown notices issued by municipal corporation. नगर निगम की टीमें सख्त हिदायत दे रही कि वे ऐसा न करें। निगम ने भोपाल में कुल 1018 नोटिस दिए हैं।

मुश्ताक अहमद खान
Editor in chief

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भोपाल में सख्त कार्रवाई
भोपाल के पॉश इलाकों जैसे अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़ियाकलां में आवासीय परिसरों के भीतर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने शनिवार से कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में निगम की टीमों ने उन सभी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है जो आवासीय भूखंडों पर नियमों के विपरीत व्यवसाय कर रहे थे। इस अभियान के तहत अब तक 15 से अधिक दुकानों और होटलों को सील किया जा चुका है, जबकि शहर भर में कुल 1018 नोटिस जारी किए गए हैं।
कार्रवाई के दौरान कई दुकानदारों ने खुद ही अपने प्रतिष्ठानों के बाहर बोर्ड लगा दिए हैं, जिनमें व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने की जानकारी दी गई है। निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कदम स्थानीय निवासियों की शिकायतों और अदालती निर्देशों के बाद उठाया गया है। उपायुक्त भुवन गुप्ता के अनुसार, कार्रवाई से पूर्व सभी संबंधितों को नियमानुसार नोटिस दिए गए थे, जिसके बाद कई व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपना काम बंद कर दिया है।
पार्षद पति से हुई नोंकझोंक और विरोध
बावड़ियाकलां में कार्रवाई के दौरान उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब निगम अमला एक टैटू शॉप को सील करने पहुंचा। वहां पूर्व पार्षद रामबाबू पाटीदार ने निगम की कार्रवाई का कड़ा विरोध किया और अमले के साथ उनकी तीखी बहस हुई। पाटीदार ने आरोप लगाया कि निगम ने व्यापारियों को बिना पर्याप्त समय दिए रातों-रात नोटिस थमा दिए हैं, जिससे उनमें भय का माहौल है। उन्होंने मांग की कि यदि नियम लागू करने हैं तो इसकी शुरुआत पुराने शहर से होनी चाहिए, न कि केवल चुनिंदा इलाकों को निशाना बनाया जाना चाहिए।
वहीं, 10 नंबर मार्केट के व्यापारियों ने भी इस कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी का तर्क है कि वे वर्षों से कमर्शियल दर पर बिजली बिल और प्रॉपर्टी टैक्स भर रहे हैं। उनके पास वैध ट्रेड लाइसेंस और जीएसटी रजिस्ट्रेशन भी है। व्यापारियों का कहना है कि शहर में पिछले 21 वर्षों से मास्टर प्लान अपडेट न होने के कारण उन्हें व्यावसायिक जगहें नहीं मिल पाईं, जिसके चलते वे आवासीय परिसरों से काम करने को मजबूर हैं।
व्यापारिक संगठनों की 'मिक्स लैंड यूज' की मांग
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (बीसीसीआई) ने भी इस मुद्दे पर व्यापारियों का समर्थन किया है। चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने कहा कि निगम का यह कदम हजारों व्यापारियों की आजीविका को प्रभावित करेगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक इस कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। बीसीसीआई ने 'मिक्स लैंड यूज' (मिश्रित भूमि उपयोग) की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है ताकि व्यापारियों को कानूनी रूप से काम करने का अवसर मिल सके।
चैंबर के सचिव अजय देवनानी ने स्पष्ट किया कि आवासीय इलाकों में अस्पताल, बैंक, क्लीनिक और शोरूम जैसे संस्थान वर्षों से नागरिकों को सेवाएं दे रहे हैं। ये सभी संस्थान सरकार को नियमित रूप से राजस्व दे रहे हैं। ऐसे में बिना किसी व्यावहारिक विकल्प के केवल 10 दिन का नोटिस देकर दुकानें बंद कराना न्यायसंगत नहीं है। व्यापारियों का मानना है कि सरकार को गुजरात की तर्ज पर नया कानून लाना चाहिए या भूमि विकास नियमों में संशोधन करना चाहिए।
आगे की स्थिति और कानूनी पेच
नगर निगम की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, आने वाले दिनों में और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। शनिवार को अरेरा कॉलोनी और बावड़ियाकलां में 19 और बड़े शोरूम व रेस्त्रां को सील करने की योजना है, जिनके कारण ट्रैफिक बाधित होने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। निगम प्रशासन का कहना है कि वे केवल अदालती आदेशों का पालन कर रहे हैं और आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी तरह बंद कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
फिलहाल, शहर के व्यापारी वर्ग में भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ निगम की सीलिंग कार्रवाई जारी है, तो दूसरी तरफ व्यापारिक संगठन इसे अपनी आजीविका पर हमला मान रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार व्यापारियों की मांग पर विचार करते हुए कोई बीच का रास्ता निकालती है या फिर आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ यह अभियान इसी तरह जारी रहेगा।

Editor in chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
