अंगदान महाभियान: भीलवाड़ा ने पूरे देश में लहराया परचम, एक महीने में 24 हजार से ज्यादा लोगों ने लिया संकल्प
Bhilwara leads India in organ donation digital campaign, 24400 people pledge. ऑर्गन डोनेशन यानी अंगदान को लेकर चलाए गए नेशनल कैंपेन में भीलवाड़ा जिले ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। भीलवाड़ा के बाद दूसरे नंबर पर गुजरात का अहमदाबाद है वहीं प्रदेश की बात की जाए तो राजस्थान भीलवाड़ा के बाद झुंझुनू सेकंड पोजीशन पर है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान का भीलवाड़ा जिला अंगदान के क्षेत्र में एक नई मिसाल बनकर उभरा है। हाल ही में चलाए गए डिजिटल ऑर्गन डोनेशन अभियान में भीलवाड़ा ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि के तहत महज एक महीने की अवधि में जिले के 24,400 से अधिक नागरिकों ने अंगदान और देहदान का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय स्तर की सफलता के बाद भीलवाड़ा प्रशासन को जयपुर में विशेष रूप से सम्मानित किया जा रहा है।
जन-आंदोलन बनी प्रधानमंत्री की पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए डिजिटल ऑर्गन डोनेशन अभियान को भीलवाड़ा में जिला कलेक्टर जसमीत संधू के नेतृत्व में एक जन-आंदोलन का रूप दिया गया। 1 जुलाई से 31 जुलाई तक चले इस सघन अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों को अंगदान के महत्व के बारे में जागरूक किया। इस दौरान लोगों के मन में अंगदान को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया गया।
अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भीलवाड़ा ने गुजरात के अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान प्राप्त किया। राज्य स्तर पर भी भीलवाड़ा ने अपनी बढ़त बनाए रखी, जबकि झुंझुनू जिला दूसरे स्थान पर रहा। इस उपलब्धि के लिए 5 अगस्त को जयपुर में आयोजित एक समारोह में जिला कलेक्टर जसमीत संधू और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजीव शर्मा को सम्मानित किया गया।
कैसे काम करती है अंगदान की प्रक्रिया
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अंगदान की प्रक्रिया बेहद सरल और पारदर्शी है। इच्छुक व्यक्ति ऑनलाइन माध्यम से संकल्प पत्र भरकर अपनी सहमति दर्ज करा सकते हैं। किसी भी दानदाता की मृत्यु के बाद, उनके परिजनों की सहमति मिलने पर ही संबंधित मेडिकल कॉलेज या अधिकृत अस्पताल की टीम आगे की प्रक्रिया पूरी करती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से स्वैच्छिक है और समाज में जीवन बचाने के उद्देश्य से प्रेरित है।
अभियान के दौरान मेडिकल टीमों ने व्यक्तिगत संवाद के माध्यम से लोगों को समझाया कि एक व्यक्ति के अंगदान से कई जरूरतमंदों को नया जीवन मिल सकता है। हृदय, लीवर, किडनी और आंखों जैसे महत्वपूर्ण अंगों का प्रत्यारोपण किसी के लिए जीवनदान साबित हो सकता है। इसी संदेश ने आम जनता को गहराई से प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप रिकॉर्ड संख्या में लोगों ने आगे आकर संकल्प पत्र भरे।
संवेदनशीलता और जन-भागीदारी का परिणाम
इस अभियान में शामिल हुए कुलदीप शर्मा जैसे कई डोनर्स का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मिलने के बाद उन्होंने बिना किसी संकोच के अंगदान का संकल्प लिया। उनका मानना है कि मृत्यु के बाद भी यदि किसी के अंग किसी जरूरतमंद की जान बचा सकें, तो इससे बड़ा संतोष और कुछ नहीं हो सकता। ऐसे ही सकारात्मक विचारों के चलते भीलवाड़ा के निवासियों ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सीएमएचओ डॉ. संजीव शर्मा ने इस सम्मान को प्रशासन की जीत के बजाय जिले के उन हजारों संवेदनशील नागरिकों की जीत बताया है, जिन्होंने मृत्यु के बाद भी दूसरों को जीवन देने का साहस दिखाया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सामूहिक प्रयासों और जन-जागरूकता का परिणाम है, जिसने भीलवाड़ा को राष्ट्रीय पटल पर गौरवान्वित किया है।
आने वाले समय में भी स्वास्थ्य विभाग इस अभियान को निरंतर जारी रखने की योजना बना रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग इस नेक कार्य से जुड़ सकें। भीलवाड़ा की यह उपलब्धि अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बनी है, जो यह दर्शाती है कि सही दिशा में किए गए जन-प्रयास समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
