भारत विकास परिषद का 64वां स्थापना दिवस: लखनऊ में सेवा और समर्पण के संकल्प के साथ मनाया गया उत्सव
Lucknow Bharat Vikas Parishad 64th Foundation Day celebration. भारत विकास परिषद, अवध प्रांत, उत्तर मध्य क्षेत्र-2 ने शुक्रवार को लखनऊ में अपना 64वां स्थापना दिवस मनाया। यह कार्यक्रम इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स सभागार, कैसरबाग में आयोजित किया गया, जिसमें परिषद के सदस्य, पदाधिकारी और शहर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को भारत विकास परिषद के अवध प्रांत, उत्तर मध्य क्षेत्र-2 द्वारा 64वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कैसरबाग स्थित इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स सभागार में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में परिषद के पदाधिकारियों, सदस्यों और शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। यह आयोजन न केवल परिषद की गौरवशाली यात्रा को याद करने का माध्यम बना, बल्कि भविष्य के सेवा कार्यों के लिए नई ऊर्जा का संचार भी किया।
1963 से निरंतर सेवा की राह पर
कार्यक्रम की शुरुआत प्रांतीय अध्यक्ष देवेंद्र स्वरूप शुक्ला द्वारा अतिथियों के स्वागत और परिचय के साथ हुई। इस अवसर पर राष्ट्रीय अतिरिक्त महासचिव मुकेश जैन ने परिषद के इतिहास और उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 10 जुलाई 1963 को दिल्ली में डॉ. सूरज प्रकाश और लाला हंसराज गुप्ता के दूरदर्शी प्रयासों से इस संस्था की नींव रखी गई थी। तब से लेकर आज तक, यह संस्था देश भर में सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
मुकेश जैन ने बताया कि वर्तमान में परिषद देश के 80 प्रांतों और 10 क्षेत्रों में सक्रिय है। संस्था का संपूर्ण कार्य 'संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण' के पांच मूल सूत्रों पर आधारित है। इन सिद्धांतों के माध्यम से परिषद एक स्वस्थ, समर्थ और संस्कारित भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल सेवा करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान
परिषद द्वारा किए जा रहे कार्यों का दायरा अत्यंत विस्तृत है। स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता तक, संस्था कई मोर्चों पर सक्रिय है। कोटा में संचालित 350 बेड का अस्पताल इसका एक बड़ा उदाहरण है, जहां बेहद कम खर्च में बाईपास सर्जरी जैसी जटिल चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह सेवा आम जनमानस के लिए एक बड़ी राहत है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी परिषद की भूमिका सराहनीय रही है। वर्ष 1967 से आयोजित की जा रही राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता और 'भारत को जानो' जैसी प्रतियोगिताएं युवाओं में देशभक्ति और ज्ञान का संचार कर रही हैं। हर साल लगभग 10 हजार स्कूलों के दो लाख से अधिक विद्यार्थी इन प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं, जो छात्रों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
निस्वार्थ सेवा का आह्वान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता चैतन्य कौशिक ने परिषद के सेवा कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने गीता के उपदेशों का स्मरण कराते हुए कहा कि निस्वार्थ भाव से किया गया सत्कर्म ही व्यक्ति को समाज में अमर बनाता है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से सेवा और दान की भावना को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया। उन्होंने 'देवता बनो, लेवता मत बनो' का मंत्र देते हुए समाज के प्रति अपने दायित्वों को निभाने पर जोर दिया।
समारोह के दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. आनंद मिश्रा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का एक भावुक क्षण वह था जब परिषद के उन वरिष्ठ सदस्यों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने 75 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है। यह सम्मान समारोह उनके द्वारा समाज के प्रति दिए गए योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक माध्यम बना।
स्थापना दिवस का यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भारत विकास परिषद अपने उद्देश्यों के प्रति पूरी तरह समर्पित है। लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल सदस्यों को एकजुट किया, बल्कि समाज सेवा के नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी। आने वाले समय में परिषद अपने सेवा कार्यों के विस्तार के साथ ही राष्ट्र निर्माण की दिशा में और भी मजबूती से कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
