बैतूल: 80 किमी पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान, फसल बीमा और खाद वितरण में धांधली का आरोप
बैतूल जिले के चोपना क्षेत्र के किसान मंगलवार को करीब 80 किलोमीटर की दूरी तय कर कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों का कहना था कि सहकारी समिति, कृषि विभाग और बैंक स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा था, इसलिए उन्हें जिला मुख्यालय आकर शिकायत करनी पड़ी।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

80 किलोमीटर का सफर तय कर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में चोपना क्षेत्र के किसानों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को सैकड़ों किसान करीब 80 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्ट्रेट में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर सहकारी समितियों, कृषि विभाग और बैंक अधिकारियों द्वारा उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें न्याय के लिए जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
बीमा राशि में भेदभाव और खाद की किल्लत
प्रदर्शनकारी किसानों ने बताया कि चोपना की बहुउद्देशीय कृषि साख सहकारी समिति से 32 गांवों के लगभग 1400 किसान जुड़े हुए हैं। इनमें से झोली, आमडोह, हिरापुर और गोल्हई बुजुर्ग पटवारी हल्के के 9 गांवों के सैकड़ों किसान खरीफ 2025 की फसल बीमा राशि से अब भी वंचित हैं। किसानों ने सवाल उठाया कि जब प्रीमियम की कटौती समय पर की गई थी, तो बीमा लाभ देने में देरी क्यों की जा रही है।
इसके अलावा, बीमा राशि के वितरण में भारी विसंगतियां सामने आई हैं। किसानों का कहना है कि समान फसल अनावारी होने के बावजूद किसी को मामूली राशि मिली है तो किसी को 35 हजार रुपये तक का भुगतान हुआ है। वहीं, खाद वितरण को लेकर भी किसानों में भारी आक्रोश है। ई-टोकन व्यवस्था के दौरान जिन किसानों को निर्धारित मात्रा से कम खाद मिली थी, अब उस बकाया खाद को देने से भी मना किया जा रहा है।
KCC ऋण सीमा बढ़ाने की मांग
किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की ऋण सीमा को लेकर भी अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उन्होंने बताया कि पहले डीएपी खाद की कीमत कम थी, लेकिन अब एनपीके खाद की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। खाद की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बावजूद KCC की वस्तु ऋण सीमा को नहीं बढ़ाया गया है। इसके कारण किसानों को पुरानी सीमा के आधार पर बहुत कम मात्रा में खाद मिल पा रही है, जिससे उनकी खेती प्रभावित हो रही है।
कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने किसानों का ज्ञापन स्वीकार करते हुए उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बीमा राशि के वितरण में हुई विसंगतियों की जांच की जाए और पात्र किसानों को जल्द से जल्द लाभ सुनिश्चित किया जाए।
जनसुनवाई में अन्य समस्याएं भी आईं सामने
मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में केवल चोपना के किसान ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों से भी लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। आमला तहसील के लीलाझर गांव के किसान रामू कौशिक ने भी फसल बीमा न मिलने की शिकायत दर्ज कराई। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी लंबित मामलों का निराकरण एक निश्चित समय-सीमा के भीतर किया जाए।
जनसुनवाई के दौरान ग्रामीण रास्तों के निर्माण, राजस्व रिकॉर्ड में सुधार, मुआवजे और आवास योजना से जुड़ी कई अन्य शिकायतें भी प्रशासन के सामने रखी गईं। कलेक्टर ने सभी मामलों में संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं ताकि ग्रामीणों को बार-बार जिला मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे भविष्य में और अधिक उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!