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औरंगाबाद: 8.53 करोड़ की लागत से बना प्रशिक्षण केंद्र बिजली के इंतजार में, उद्घाटन के 5 महीने बाद भी ताले

Aurangabad resource and training center inauguration delay. Follow latest updates on Dainik Bhaskar. औरंगाबाद में जिला स्तरीय संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र उद्घाटन के पांच माह बाद भी पूरी तरह चालू नहीं हो सका है। करीब 8 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत से तैयार आधुनिक भवन अब तक बिजली कनेक्शन का इंतजार कर रहा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 जुलाई 2026 अपडेट 1 घंटे पहले2 मिनट पढ़ें 0
औरंगाबाद: 8.53 करोड़ की लागत से बना प्रशिक्षण केंद्र बिजली के इंतजार में, उद्घाटन के 5 महीने बाद भी ताले
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बिहार के औरंगाबाद जिले में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां करीब 8 करोड़ 53 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार जिला स्तरीय संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन हुए पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन यह भवन अब तक पूरी तरह से चालू नहीं हो सका है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह इमारत फिलहाल बिजली कनेक्शन के अभाव में धूल फांक रही है।

बिजली कनेक्शन के बिना अधर में अटकी सेवाएं

इस आधुनिक भवन का निर्माण पशुपालन, गव्य विकास और मत्स्य विभाग के कार्यालयों को एक ही छत के नीचे लाने के उद्देश्य से किया गया था। हालांकि, स्थायी विद्युत आपूर्ति न मिल पाने के कारण इन विभागों के कार्यालयों को नए भवन में स्थानांतरित करना संभव नहीं हो पाया है। नतीजतन, करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह इमारत उद्घाटन के बाद भी आम जनता के लिए उपयोगहीन साबित हो रही है।

वर्तमान में, ये तीनों विभाग अपने पुराने स्थानों से ही काम कर रहे हैं। जिला गव्य विकास कार्यालय समाहरणालय परिसर से, जबकि जिला मत्स्य कार्यालय नवाडी मोहल्ला स्थित अपने पुराने दफ्तर से संचालित हो रहा है। इससे न केवल विभागीय कार्यों में समन्वय की कमी बनी हुई है, बल्कि आम लोगों को भी अपने काम के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

तकनीकी बाधाओं से जूझ रहा विभाग

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस नए भवन में कंप्यूटर, इंटरनेट सर्वर और अन्य कार्यालयी उपकरणों को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्थायी बिजली कनेक्शन अनिवार्य है। बिना बिजली के न तो सर्वर काम कर सकते हैं और न ही फाइलों की शिफ्टिंग सुरक्षित तरीके से हो सकती है। यही कारण है कि भवन पूरी तरह तैयार होने के बावजूद अधिकांश समय खाली पड़ा रहता है।

इस संबंध में जब जिला पशुपालन पदाधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनसे बात नहीं हो सकी। कार्यालय के अन्य कर्मियों ने बताया कि संबंधित अधिकारियों के स्थानांतरण के कारण भी कामकाज में देरी हुई है। विभाग के एक अन्य अधिकारी ने स्पष्ट किया कि बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया चल रही है और जैसे ही बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, विभागों को नए भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

आधुनिक सुविधाओं का है दावा

बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा निर्मित यह दो मंजिला केंद्र राजकीय पशु औषधालय परिसर में स्थित है। 8 करोड़ 53 लाख 29 हजार 610 रुपये की लागत से बने इस केंद्र में प्रशिक्षण कक्ष, सभागार, बैठक कक्ष और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसका मुख्य लक्ष्य पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों को उन्नत तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ देना है।

जब यह केंद्र पूरी तरह से क्रियाशील हो जाएगा, तो इससे न केवल विभागीय समन्वय बेहतर होगा, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी। फिलहाल, स्थानीय लोगों और संबंधित विभागों की निगाहें बिजली विभाग की ओर टिकी हैं, ताकि जल्द से जल्द इस केंद्र का लाभ आम जनता तक पहुंच सके।

टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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