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औरंगाबाद: सरकारी स्कूल में बच्चों से मजदूरी कराने का वीडियो वायरल, पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप

औरंगाबाद जिले के बारुण प्रखंड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय, चंदौली एक बार फिर विवादों में आ गया है। वायरल वीडियो में बच्चों से काम कराए जाने का दावा किया जा रहा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
औरंगाबाद: सरकारी स्कूल में बच्चों से मजदूरी कराने का वीडियो वायरल, पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप
मूल स्रोत

स्कूल में बच्चों से काम कराने का वीडियो वायरल

बिहार के औरंगाबाद जिले के बारुण प्रखंड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय, चंदौली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। स्कूल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्कूली बच्चों से स्कूल परिसर में बालू और मिट्टी ढुलवाने के साथ ही बोरा उठवाने जैसे शारीरिक श्रम कराए जा रहे हैं। यह घटना शिक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

आरोप है कि बच्चों से यह काम स्कूल के समय के दौरान ही कराया गया। इतना ही नहीं, स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि इन कार्यों के बदले बच्चों को एक्सपायर्ड बिस्किट दिए गए। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सीधे तौर पर बाल संरक्षण नियमों और शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है।

39 छात्रों पर 6 शिक्षक, फिर भी पढ़ाई की जगह मजदूरी

विद्यालय की स्थिति को लेकर एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। राजकीय मध्य विद्यालय चंदौली में कुल छात्रों की संख्या मात्र 39 है, जिन्हें पढ़ाने के लिए सरकार द्वारा 6 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। शिक्षक-छात्र अनुपात के हिसाब से यह एक आदर्श स्थिति होनी चाहिए थी, लेकिन इसके बावजूद बच्चों से पढ़ाई के बजाय मजदूरी कराना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

इस पूरे मामले पर जब स्कूल के प्रधानाध्यापक अखिलेश तिवारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनके इस जवाब ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।

पहले भी प्रमाणित हो चुके हैं प्रधानाध्यापक पर आरोप

यह पहली बार नहीं है जब यह विद्यालय और इसके प्रधानाध्यापक विवादों में आए हैं। पूर्व में भी जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा कराई गई जांच में अखिलेश तिवारी के खिलाफ कई आरोप प्रमाणित पाए गए थे। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि प्रधानाध्यापक न केवल शिक्षकों के साथ समन्वय बनाने में विफल रहे, बल्कि उन्होंने स्कूल परिसर की सफाई न कराने और जांच दल को सहयोग न देने जैसी गंभीर गलतियां भी की थीं।

पिछली जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि विद्यालय कार्यालय का उपयोग स्नान के लिए किया जाता था और बच्चों से निजी कार्य कराए जाते थे। उस समय तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगा था और कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन ताजा वीडियो ने साबित कर दिया है कि स्कूल की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया है।

निष्पक्ष जांच की मांग और भविष्य की राह

वायरल वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। मांग की जा रही है कि शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से ले और एक स्वतंत्र जांच कमेटी गठित करे। लोगों का कहना है कि यदि विभागीय दस्तावेजों और वीडियो के आधार पर दोषियों को दंडित नहीं किया गया, तो बच्चों का भविष्य अंधकार में रहेगा।

फिलहाल, शिक्षा विभाग के अधिकारी इस मामले की पड़ताल करने की बात कह रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार विभाग प्रधानाध्यापक के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई करता है या मामला फिर से फाइलों में दबकर रह जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे प्रकरण की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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