औरंगाबाद: नाली विवाद में हत्या के 6 दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने सुनाया फैसला
Aurangabad Hasura murder case court verdict 6 convicts sentenced life imprisonment. व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम उमेश प्रसाद ने आज सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अपर लोक अभियोजक देवीनंदन सिंह ने बताया कि न्यायालय ने हसपुरा थाना क्षेत्र के किशुनपुर गांव निवासी छोटेलाल कुमार, अजीत कुमार, रोहित कुमार, मनोज कुमार, गुड्डू कुमार एवं सुरेन्द्र सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कार

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

तीन साल पुराने हत्याकांड में न्याय की जीत
बिहार के औरंगाबाद जिले में तीन साल पहले हुए एक चर्चित हत्याकांड में व्यवहार न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम उमेश प्रसाद की अदालत ने हसपुरा थाना क्षेत्र के किशुनपुर गांव में हुई तपेश्वर सिंह की हत्या के मामले में छह दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले ने पीड़ित परिवार को लंबे इंतजार के बाद न्याय दिलाया है।
अदालत ने जिन लोगों को दोषी करार दिया है, उनमें छोटेलाल कुमार, अजीत कुमार, रोहित कुमार, मनोज कुमार, गुड्डू कुमार और सुरेन्द्र सिंह शामिल हैं। इन सभी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक दोषी पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। साथ ही, धारा 147 के तहत भी इन्हें दो-दो वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा दी गई है।
नाली का विवाद बना जानलेवा
घटना का विवरण देते हुए अभियोजन पक्ष ने बताया कि यह विवाद 10 जून 2023 की रात शुरू हुआ था। मृतक तपेश्वर सिंह के घर के पास नाली पर रखे सीमेंट के पटिए को कुछ लोग जबरन हटा रहे थे। जब तपेश्वर सिंह ने इसका विरोध किया, तो आरोपितों ने उन पर हमला कर दिया। छोटेलाल कुमार ने लोहे की रॉड से उनके सिर पर वार किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
हमले के दौरान अन्य आरोपितों ने लाठी और कुदाल के पिछले हिस्से से तपेश्वर सिंह को बुरी तरह पीटा। उन्हें तुरंत हसपुरा अस्पताल ले जाया गया, जहां से स्थिति गंभीर होने के कारण गया मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। बेहतर इलाज के लिए उन्हें पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां मस्तिष्क का ऑपरेशन भी हुआ, लेकिन घटना के 11 दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई।
साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सजा
इस मामले में मृतक की पत्नी उषा देवी ने 15 जून 2023 को हसपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए। इस दौरान कुल 10 गवाहों ने अपनी गवाही दी, जिसके आधार पर अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा था।
अदालत ने 20 जुलाई 2026 को इन छह अभियुक्तों को दोषी करार दिया था और उनके बंधपत्र रद्द कर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। गुरुवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने आजीवन कारावास का आदेश पारित किया। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार को भी निर्देश दिया है कि वे पीड़ित परिवार को उचित प्रतिकर (मुआवजा) दिलाना सुनिश्चित करें।
यह फैसला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कानूनी जानकारों का मानना है कि ठोस सबूतों और समय पर गवाही पूरी होने के कारण ही दोषियों को इतनी जल्दी सजा मिल सकी। पीड़ित परिवार ने अदालत के इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है, जिसे न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
