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औरंगाबाद: 11 साल पुराने अपहरण और हत्याकांड में दोषी को उम्रकैद, जमीन विवाद में ली थी मासूम की जान

साल पुराने मामले में कोर्ट ने की सुनवाई, किडनैपिंग के 3 महीने बाद मिली थी बॉडी। अपहरण-हत्या मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

20 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
औरंगाबाद: 11 साल पुराने अपहरण और हत्याकांड में दोषी को उम्रकैद, जमीन विवाद में ली थी मासूम की जान
मूल स्रोत

बिहार के औरंगाबाद जिले में एक दशक से अधिक समय से लंबित अपहरण और हत्या के एक सनसनीखेज मामले में स्थानीय अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार की अदालत ने 11 साल पुराने इस मामले में आरोपी सुरेन्द्र मेहता को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला रिसियप थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जिसने लंबे समय तक स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया था।

क्या था पूरा मामला?

घटना की शुरुआत 17 जून 2011 को हुई थी। प्राथमिकी दर्ज कराने वाले महेंद्र मेहता के अनुसार, उनके गांव में एक बारात आई थी। उनका नाबालिग बेटा विवेक कुमार बरातियों के साथ ही सो गया था। इसी दौरान सुरेन्द्र मेहता ने मौका पाकर मासूम का अपहरण कर लिया। अपहरण के बाद से ही परिवार में कोहराम मच गया था और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।

अपहरण के करीब तीन महीने बाद, एक सिंचाई नहर से एक बच्चे का शव बरामद किया गया। शव की स्थिति काफी खराब थी, लेकिन परिजनों ने बच्चे के कपड़ों, बेल्ट और दांतों की बनावट के आधार पर उसकी पहचान विवेक कुमार के रूप में की। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी और परिवार के लिए यह एक कभी न भरने वाला जख्म बन गया।

जमीन विवाद बनी हत्या की वजह

अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस जघन्य अपराध के पीछे मुख्य कारण जमीन संबंधी विवाद था। वादी और आरोपी सुरेन्द्र मेहता के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर रंजिश चल रही थी। इसी रंजिश का बदला लेने के लिए आरोपी ने मासूम बच्चे को अपना निशाना बनाया। अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया कि आरोपी ने सोची-समझी साजिश के तहत इस वारदात को अंजाम दिया था।

अदालत ने 10 जुलाई को ही आरोपी को नाबालिग के अपहरण, हत्या और साक्ष्य छिपाने के आरोप में दोषी करार दे दिया था। दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी का बंधपत्र रद्द कर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक अजय कुमार ने मामले के तथ्यों को मजबूती से अदालत के समक्ष रखा।

अदालत का फैसला और सजा का विवरण

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार ने सजा सुनाते हुए भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की है। अदालत ने धारा 364 (अपहरण) के तहत उम्रकैद और एक लाख रुपये का जुर्माना, धारा 302 (हत्या) के तहत उम्रकैद और दो लाख रुपये का जुर्माना, तथा धारा 201 (साक्ष्य मिटाने) के तहत 5 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। कुल मिलाकर आरोपी पर साढ़े तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्यायपालिका पर अपना भरोसा जताया है। 11 साल के लंबे इंतजार के बाद मिले इस न्याय को परिवार के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि मासूम को खोने का दर्द उनके लिए हमेशा बना रहेगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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