ब्रेकिंग
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव

औरंगाबाद: नाग पंचमी पर बक्स बाबा मंदिर में आस्था का सैलाब, 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने की पूजा

औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड स्थित प्रसिद्ध बक्स बाबा मंदिर में नाग पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। बक्स बाबा मंदिर में नाग पंचमी के अवसर पर पिछले करीब 60 वर्षों से मेले का आयोजन होता आ रहा है।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

17 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
औरंगाबाद: नाग पंचमी पर बक्स बाबा मंदिर में आस्था का सैलाब, 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने की पूजा
मूल स्रोत

60 साल पुरानी परंपरा के साथ उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

बिहार के औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड में स्थित ऐतिहासिक बक्स बाबा मंदिर में नाग पंचमी के अवसर पर भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। नाग पंचमी के पावन पर्व पर यहां पिछले छह दशकों से मेले का आयोजन किया जा रहा है, जो इस क्षेत्र की एक प्रमुख धार्मिक पहचान बन चुका है। सुबह होते ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं, जिसमें महिलाओं और बच्चों की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।

दूर-दराज के गांवों से आए भक्तों ने विधि-विधान के साथ नाग देवता की पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं, जिसके चलते लोग अपने परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में सजी दुकानों और मेले के माहौल ने इस धार्मिक आयोजन को और भी जीवंत बना दिया।

प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए थे। मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। सदर-2 के एसडीपीओ आदित्य कुमार और मदनपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने स्वयं मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और भीड़ को नियंत्रित करने के निर्देश दिए।

प्रशासन की टीम लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिनमें जिला परिषद सदस्य शंकर यादवेंदु भी शामिल थे, ने प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में अपना योगदान दिया। अनुमान के मुताबिक, इस वर्ष मेले में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शिरकत की।

क्षेत्र में नाग पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

नाग पंचमी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष आस्था का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देवता भगवान शिव के आभूषण और भगवान विष्णु की शैय्या के रूप में पूजनीय हैं। इस दिन नागों की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है और कालसर्प दोष जैसे ज्योतिषीय कष्टों से शांति प्राप्त होती है। मदनपुर के अलावा कुटुंबा प्रखंड के ओरडीह पहाड़ी स्थित नाग बाबा मंदिर में भी भक्तों ने दूध और लावा अर्पित कर नाग देवता को नमन किया।

इस पर्व से जुड़ी एक विशेष परंपरा मदनपुर क्षेत्र में देखने को मिलती है, जहां श्रद्धालु नाग पंचमी के दिन नमक का सेवन करने से परहेज करते हैं। भक्त सात्विक आहार के रूप में फल और दूध का सेवन करते हैं और दिनभर उपवास रखकर शाम को पूजा के बाद ही फलाहार करते हैं। यह परंपरा संयम और सात्विक जीवन के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है।

आस्था और अनुशासन का संगम

पूरे दिन मंदिर परिसर में धार्मिक भजनों और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती रही। श्रद्धालुओं ने न केवल पूजा की, बल्कि मेले में खरीदारी का आनंद भी लिया। प्रशासन की मुस्तैदी और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह विशाल आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। नाग पंचमी का यह पर्व औरंगाबाद जिले में सामाजिक समरसता और अटूट आस्था का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।

SponsoredMushfan Digital Studios - We Build Brands. We Grow Businesses.

टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें