इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती: बकाया भुगतान न करने पर हापुड़ के सीएमओ का खाता कुर्क करने का आदेश
Allahabad High Court orders Hapur CMO account attachment over pending medical agency payment updates. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वसीम मेडिकल एजेंसी मामले में सुनवाई करते हुए दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति के बकाया भुगतान न करने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने हापुड़ के सी एम ओ का खाता कुर्क करने का आदेश दिया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बकाया भुगतान पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वसीम मेडिकल एजेंसी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के प्रति सख्त रवैया अपनाया है। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति के बाद भी भुगतान न करने के मामले में हापुड़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के बैंक खाते को कुर्क करने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता एजेंसी ने आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आपूर्ति की गई दवाओं और चिकित्सा सामग्री का भुगतान लंबे समय से लंबित है। इस मामले में बरेली, सहारनपुर, बिजनौर, आगरा, गाजियाबाद, कासगंज, हरदोई, हापुड़, रामपुर, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर, जौनपुर और बदायूं के सीएमओ पर बकाया राशि का भुगतान न करने का आरोप है।
बजट की कमी का बहाना नहीं चलेगा
सुनवाई के दौरान अदालत को जानकारी दी गई कि बरेली, सहारनपुर, बिजनौर, गाजियाबाद, रामपुर, अलीगढ़, आगरा और जौनपुर के सीएमओ ने बकाया राशि का भुगतान कर दिया है। हालांकि, हापुड़ के सीएमओ ने अदालत में स्वीकार किया कि उनके पास अभी भी 1,75,784 रुपये का भुगतान बकाया है। उन्होंने इसके लिए बजट की कमी और तकनीकी कारणों का हवाला दिया।
अदालत ने सीएमओ के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि व्यावसायिक लेन-देन में स्वीकृत देनदारी के मामले में बजट की कमी का बहाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसे एक 'नौकरशाही बहाना' करार देते हुए कहा कि सरकार के पास सभी संसाधन उपलब्ध हैं और भुगतान में देरी करना अनुचित है।
हापुड़ सीएमओ के खाते पर कुर्की की कार्रवाई
न्यायालय ने हापुड़ के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) को निर्देश दिए हैं कि वे सीएमओ हापुड़ के बैंक खाते से 1,75,784 रुपये की राशि तुरंत कुर्क करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही यह भुगतान एजेंसी को प्राप्त हो जाएगा, कुर्की की कार्रवाई स्वतः समाप्त हो जाएगी। इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट 22 जुलाई 2026 तक अदालत में पेश करने का आदेश दिया गया है।
अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अन्य जिलों के अधिकारियों को भी तलब किया है। कासगंज, हरदोई, मुजफ्फरनगर, जौनपुर और बदायूं के सीएमओ को 22 जुलाई 2026 को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। उनसे यह स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उनके संबंधित जिलों में भी बकाया भुगतान के लिए उनके खाते क्यों न कुर्क किए जाएं।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
यह मामला चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखला में भुगतान की पारदर्शिता और समयबद्धता पर सवाल खड़े करता है। अदालत का यह आदेश अन्य सरकारी विभागों के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि व्यावसायिक अनुबंधों का पालन करना अनिवार्य है। 22 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो जाएगा कि शेष जिलों के सीएमओ अदालत के समक्ष क्या पक्ष रखते हैं और बकाया भुगतान की स्थिति क्या रहती है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
