अजमेर में डीएलसी दरों में फिर भारी बढ़ोतरी, आम आदमी की जेब पर बढ़ेगा बोझ
Ajmer Congress opposes DLC rate hike, demands rollback from collector. अजमेर जिले में प्रस्तावित डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) दरों में 25 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का विरोध शुरू हो गया है। बुधवार को अजमेर शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय जैन के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर 1 अगस्त 2026 से लागू होने वाली नई डीएलसी दरों पर तत्काल रोक लगाने और निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान के अजमेर जिले में जमीन और मकान की सरकारी कीमतों यानी डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। प्रशासन द्वारा 1 अगस्त 2026 से नई दरें लागू करने की तैयारी है, जिसमें 25 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। इस फैसले के विरोध में कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है और इसे आम जनता के लिए आर्थिक रूप से घातक बताया है।
एक साल में पांचवीं बार बढ़ोतरी पर सवाल
अजमेर शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय जैन के नेतृत्व में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस फैसले पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले एक वर्ष के भीतर यह पांचवीं बार है जब डीएलसी दरों को बढ़ाया जा रहा है। इससे पहले अप्रैल 2026 में भी दरों में 50 प्रतिशत तक का इजाफा किया गया था, जिससे पहले ही रियल एस्टेट बाजार प्रभावित हुआ है।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बार-बार की जा रही यह वृद्धि आम नागरिक की पहुंच से घर और जमीन का सपना दूर कर रही है। नेताओं का मानना है कि महंगाई और बेरोजगारी के इस दौर में सरकार का यह कदम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला है, जिसका सीधा असर संपत्ति के लेन-देन और नए निवेश पर पड़ेगा।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर जताई आपत्ति
कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण निर्णय प्रक्रिया में जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर भी कड़ा एतराज जताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जिला स्तरीय समिति की बैठक में शहर के जनप्रतिनिधियों का न होना यह दर्शाता है कि जनता के हितों के प्रति गंभीरता नहीं बरती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में पहले से ही डीएलसी दरें बाजार मूल्य से अधिक चल रही हैं, ऐसे में नई बढ़ोतरी पूरी तरह से अव्यावहारिक है।
विजय जैन ने कहा कि शहर के कई इलाकों में सरकारी दरें वास्तविक बाजार भाव से कहीं ज्यादा हैं, जिससे रजिस्ट्री और अन्य सरकारी शुल्कों का भार आम आदमी पर बढ़ जाता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस निर्णय को फिलहाल स्थगित किया जाए और इसे लागू करने से पहले जमीनी हकीकत को समझा जाए।
सर्वसम्मति से निर्णय लेने की मांग
कांग्रेस ने प्रशासन को सुझाव दिया है कि डीएलसी दरों के निर्धारण के लिए एक नई और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। पार्टी की मांग है कि जिला स्तरीय बैठक को दोबारा बुलाया जाए, जिसमें न केवल राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को, बल्कि व्यापारिक संगठनों और स्थानीय सामाजिक संस्थाओं को भी शामिल किया जाए।
प्रशासन से यह भी आग्रह किया गया है कि किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी से पहले सभी पक्षों की राय ली जाए ताकि सर्वसम्मति से कोई निर्णय लिया जा सके। फिलहाल, इस ज्ञापन के बाद प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन 1 अगस्त की समय सीमा नजदीक आने के कारण शहर में इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
