जंतर-मंतर पर सुरक्षा घेरे और पाबंदियों पर भड़के अभिजीत दीपके, दिल्ली की व्यवस्था पर उठाए सवाल
CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा- जंतर-मंतर को बैरिकैड्स लगाकर जेल बना दिया। मुझे नहीं पता कि PM को धर्मेंद्र प्रधान में ऐसा क्या टैलेंट दिखता है कि उन्हें बचाने के लिए पूरी दिल्ली का जीना हराम कर दिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर लगाए गए भारी बैरिकेड्स और पुलिस द्वारा की गई नाकेबंदी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस क्षेत्र को एक जेल के समान बताते हुए आम नागरिकों को हो रही असुविधा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सुरक्षा के नाम पर आम जनजीवन प्रभावित
अभिजीत दीपके ने अपने बयान में कहा कि जंतर-मंतर को चारों ओर से बैरिकेड्स लगाकर पूरी तरह से सील कर दिया गया है, जिससे यह स्थान एक जेल की तरह प्रतीत हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा के नाम पर की गई इन पाबंदियों के कारण न केवल आवाजाही बाधित हुई है, बल्कि आसपास के मेट्रो स्टेशनों और कनॉट प्लेस (सीपी) क्षेत्र में स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी बंद करने के लिए मजबूर किया गया है।
दीपके ने आगे कहा कि इस तरह की सख्ती से दिल्ली का सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी एक व्यक्ति या समूह को बचाने के लिए पूरे शहर की व्यवस्था को ठप करना उचित है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम लेते हुए तंज कसा कि उन्हें बचाने के लिए प्रशासन द्वारा अपनाई गई यह रणनीति आम जनता के लिए परेशानी का सबब बन गई है।
प्रशासनिक सख्ती और विरोध के स्वर
जंतर-मंतर को प्रदर्शनों के लिए एक प्रमुख स्थान माना जाता है, लेकिन अक्सर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देकर यहां पुलिस द्वारा भारी तैनाती की जाती है। दीपके का तर्क है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन प्रशासन द्वारा जिस तरह से पूरे इलाके को किले में तब्दील किया गया है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मेट्रो स्टेशन और सीपी जैसे व्यस्त इलाकों में दुकानों को बंद करवाना आर्थिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचाता है। दीपके के अनुसार, सुरक्षा के नाम पर की गई यह घेराबंदी न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह दिल्ली के नागरिकों के अधिकारों का हनन भी है।
क्या है पूरा मामला?
हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर प्रदर्शनों का दौर जारी है। इसी के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने एहतियात के तौर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। हालांकि, इन इंतजामों के कारण स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दीपके का यह बयान इसी कड़ी में प्रशासन की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना उनकी प्राथमिकता है, जिसके लिए समय-समय पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों के बीच इस मुद्दे पर असंतोष बढ़ता जा रहा है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रशासन अपनी सुरक्षा नीतियों में कोई बदलाव करता है या फिर जंतर-मंतर पर इसी तरह की पाबंदियां जारी रहेंगी। अभिजीत दीपके जैसे कार्यकर्ताओं की मुखरता ने इस मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
