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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दीपके का तंज: बोले- 'कॉकरोच' टिप्पणी ने बदल दी पूरी तस्वीर

हमें कॉकरोच कहने के लिए मैं CJI सूर्यकांत का शुक्रिया अदा करता हूं। अगर आपने हमें कॉकरोच न कहा होता, तो प्रधान ने इस्तीफा न दिया होता

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

25 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दीपके का तंज: बोले- 'कॉकरोच' टिप्पणी ने बदल दी पूरी तस्वीर
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सीजेआई की टिप्पणी और इस्तीफे का कनेक्शन

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के प्रति आभार व्यक्त किया है। दीपके का मानना है कि यदि सीजेआई ने युवाओं को 'कॉकरोच' न कहा होता, तो शायद यह आंदोलन इतना प्रभावी नहीं होता और प्रधान को अपना पद नहीं छोड़ना पड़ता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कॉकरोच एक बार कहीं घुस जाए तो आसानी से बाहर नहीं निकलता, और अब सरकार को यह समझ आ गया है।

यह पूरा घटनाक्रम 15 मई को शुरू हुआ था, जब सीजेआई सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी की थी। उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से करते हुए कहा था कि ये लोग बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या आरटीआई कार्यकर्ता बनकर सिस्टम पर हमला करते हैं। हालांकि, सीजेआई ने बाद में स्पष्ट किया था कि उनकी टिप्पणी केवल फर्जी डिग्री धारकों के लिए थी, लेकिन तब तक यह शब्द एक बड़े छात्र आंदोलन का प्रतीक बन चुका था।

डिजिटल क्रांति और कॉकरोच जनता पार्टी का उदय

सीजेआई की टिप्पणी के बाद अभिजीत दीपके ने 16 मई की रात 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक सोशल मीडिया पेज बनाया। देखते ही देखते यह व्यंग्यात्मक पेज एक गंभीर डिजिटल आंदोलन में बदल गया। छात्रों ने 'कॉकरोच' शब्द को अपना हथियार बनाया और सोशल मीडिया पर मीम्स, कार्टून और पोस्टर्स की बाढ़ आ गई। CJP की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या 2.63 करोड़ तक पहुंच गई, जो देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों से भी कहीं अधिक है।

इस आंदोलन ने पारंपरिक विरोध प्रदर्शनों से हटकर डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता दी। CJP ने अपनी एक वेबसाइट बनाई और ऑनलाइन पिटीशन के जरिए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। इस पिटीशन पर 10 लाख से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए। दीपके ने स्पष्ट किया कि CJP चुनाव आयोग में पंजीकृत कोई औपचारिक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि यह एक अनौपचारिक मंच है जो युवाओं की आवाज उठा रहा है।

आंदोलन की सफलता और भविष्य की राह

22 मई को पहली बार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग औपचारिक रूप से उठी और 72 दिनों के संघर्ष के बाद आखिरकार उन्हें पद छोड़ना पड़ा। दीपके का कहना है कि यह केवल एक शुरुआत है। उन्होंने चेतावनी दी है कि कॉकरोच जनता पार्टी अब सिस्टम पर अपनी पैठ बना चुकी है और वे अपनी मांगों को लेकर आगे भी मुखर रहेंगे। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों का नेतृत्व भी दीपके ने ही किया था।

इस पूरे प्रकरण ने सरकार के लिए एक नई चुनौती पेश की है। जहां एक ओर सरकार इसे डैमेज कंट्रोल के रूप में देख रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इसे शिक्षा प्रणाली की विफलता बता रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है। यह घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि सोशल मीडिया के दौर में एक छोटी सी टिप्पणी किस तरह बड़े राजनीतिक बदलाव का कारण बन सकती है।

वर्तमान में, कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के बाद शांत होता दिख रहा है, लेकिन इसने देश के राजनीतिक विमर्श में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। अभिजीत दीपके और उनके समर्थकों ने यह साबित कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी सत्ता को जवाबदेह बनाया जा सकता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार युवाओं की अन्य मांगों पर भी विचार करेगी या यह केवल एक प्रतीकात्मक इस्तीफा बनकर रह जाएगा।

अंततः, यह आंदोलन न केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित रहा, बल्कि इसने युवाओं की बढ़ती राजनीतिक चेतना और डिजिटल सक्रियता को भी रेखांकित किया है। सीजेआई की उस विवादास्पद टिप्पणी ने अनजाने में ही एक ऐसे मंच को जन्म दिया, जिसने देश की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बना ली है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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