1992 करोड़ के बैंक घोटाले में ईडी को बड़ी कामयाबी, विशेष कोर्ट ने 25 आरोपियों के खिलाफ शुरू की कार्रवाई
Special PMLA Court Lucknow takes cognizance of EDs charge sheet in Rs 1992 crore bank scam, initiating proceedings against 25 accused.

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

जेवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला
प्रयागराज में सामने आए 1992 करोड़ रुपए के विशाल बैंक घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को एक महत्वपूर्ण कानूनी सफलता मिली है। लखनऊ स्थित विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट ने इस मामले में ईडी द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट का संज्ञान ले लिया है। कोर्ट ने जेवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उससे जुड़े 25 आरोपियों व कंपनियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ चल रही जांच में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
ईडी की प्रयागराज सब-जोनल टीम ने इस मामले की गहन जांच की थी। जांच एजेंसी ने अपनी प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट में स्पष्ट किया है कि किस प्रकार कंपनी ने सुनियोजित तरीके से बैंकों के समूह को चूना लगाया। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब आरोपियों की मुश्किलें बढ़ना तय है, क्योंकि अब उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए लिया गया भारी कर्ज
जांच में सामने आया है कि जेवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज ने बैंकों से कर्ज हासिल करने के लिए फर्जी रिकॉर्ड का सहारा लिया था। कंपनी ने अपने कारोबार, स्टॉक और वित्तीय खातों से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर की। टर्नओवर को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया और कंपनी को हो रहे वास्तविक नुकसान को पूरी तरह से छिपाया गया। इन्हीं भ्रामक दस्तावेजों को आधार बनाकर बैंकों से लगातार भारी-भरकम लोन लिए गए।
जब कंपनी कर्ज की किश्तें चुकाने में विफल रही, तो बैंकों को इस बड़े घोटाले का अहसास हुआ। कंपनी द्वारा लिए गए लोन खाते एनपीए (NPA) घोषित कर दिए गए, जिससे बैंकों को कुल 1992 करोड़ रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस वित्तीय धोखाधड़ी के सामने आने के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
छापेमारी और संपत्तियों की कुर्की
मामले की जांच के दौरान ईडी ने देश भर में 13 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सबूत हाथ लगे, जो आरोपियों की संलिप्तता को साबित करने के लिए पर्याप्त थे। इसके अलावा, ईडी ने मामले से जुड़े गवाहों और आरोपियों के बयान भी दर्ज किए हैं। बैंक रिकॉर्ड और कंपनी के वित्तीय दस्तावेजों का बारीकी से विश्लेषण किया गया है।
ईडी ने इस मामले में अब तक 878.67 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को जब्त किया है। इन संपत्तियों की कुर्की के आदेशों को संबंधित प्राधिकरण द्वारा भी मंजूरी दी जा चुकी है। यह कार्रवाई घोटाले की राशि की भरपाई करने के उद्देश्य से की गई है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
विशेष कोर्ट में चार्जशीट पर संज्ञान लिए जाने के बाद अब मामले की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। इस मामले में सत्य नारायण झुनझुनवाला और अनिल कुमार खेमका समेत कुल 25 नामजद आरोपी और कंपनियां शामिल हैं। ईडी के अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। वर्तमान में जो साक्ष्य सामने आए हैं, उनके आधार पर कोर्ट में केस आगे बढ़ाया जाएगा।
अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच के दौरान कोई नया तथ्य या साक्ष्य सामने आता है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, कोर्ट का यह निर्णय वित्तीय अपराधों में लिप्त लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
