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आगरा में वायरल फ्लू का प्रकोप: ओपीडी में 70 फीसदी मरीज, बदलता वायरस बना चुनौती

बारिश के मौसम में वायरल फीवर, फ्लू और डायरिया के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। मेडिसिन विभाग के डॉक्टर डॉ. प्रकाश के मुताबिक, इन दिनों OPD में आने वाले करीब 70 प्रतिशत मरीज वायरल इंफेक्शन से पीड़ित हैं।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

25 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
आगरा में वायरल फ्लू का प्रकोप: ओपीडी में 70 फीसदी मरीज, बदलता वायरस बना चुनौती
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आगरा में बारिश के मौसम के साथ ही वायरल संक्रमण के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। स्थानीय अस्पतालों के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में आने वाले मरीजों में से करीब 70 प्रतिशत लोग वायरल फीवर और फ्लू के लक्षणों से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह संक्रमण न केवल सामान्य लोगों को बल्कि मजबूत इम्युनिटी वाले व्यक्तियों को भी अपनी चपेट में ले रहा है, जिससे चिंता बढ़ गई है।

बदलते स्वरूप से बढ़ी मुश्किलें

चिकित्सकों का मानना है कि इंफ्लुएंजा वायरस लगातार अपना स्वरूप बदल रहा है। इस म्यूटेशन के कारण शरीर में पहले से मौजूद एंटीबॉडी नए संक्रमण के खिलाफ पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो पा रहे हैं। यही कारण है कि अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता होने के बावजूद लोग बार-बार बीमार पड़ रहे हैं। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि केवल इम्युनिटी पर निर्भर रहने के बजाय संक्रमण से बचाव के उपायों को अपनाना अब अनिवार्य हो गया है।

संक्रमण की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मरीजों को पूरी तरह स्वस्थ होने में एक सप्ताह से अधिक का समय लग रहा है। शुरुआत में गले में खराश और हल्के बुखार के साथ शुरू होने वाली यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर में अत्यधिक कमजोरी पैदा कर रही है।

गंभीर मरीजों और बच्चों के लिए खतरा

विशेष रूप से डायबिटीज, अस्थमा, एचआईवी या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए यह फ्लू अधिक घातक साबित हो सकता है। सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों में संक्रमण के गंभीर होने का खतरा सबसे ज्यादा है। यदि समय पर उपचार न मिले, तो यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। इसलिए, पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

बच्चों में भी वायरल फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बच्चों में संक्रमण बढ़ने पर निमोनिया जैसी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। यदि बच्चे को तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ या अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण महसूस हों, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है।

डायरिया और पेट संबंधी समस्याओं का बढ़ता असर

वायरल फीवर के साथ-साथ पेट संबंधी बीमारियों के मामलों में भी 10 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। ओपीडी में आने वाले कई मरीज पेट दर्द, लूज मोशन और डिहाइड्रेशन की शिकायत कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में दूषित पानी और भोजन के कारण डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। मरीजों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है।

बचाव के उपायों पर जोर देते हुए डॉक्टरों ने भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का उपयोग करने, हाथों को बार-बार धोने और संक्रमित व्यक्तियों से उचित दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। इसके अलावा, अचानक तापमान में बदलाव से बचने और ठंडा पानी पीने से परहेज करने को कहा गया है। बारिश के इस मौसम में लापरवाही बरतने से संक्रमण की चपेट में आने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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