ओलंपिक प्रदर्शन पर पीएमओ के बयान पर विनेश फोगाट का तीखा हमला, खेल महासंघों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा भारत की ओलंपिक में भागीदारी और पदक तालिका बढ़ाने को लेकर किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट (ट्वीट) पर देश की दिग्गज पहलवान विनेश फोगाट ने जोरदार पलटवार किया है। विनेश ने खेल महासंघों की मौजूदा स्थिति, महिलाओं के शोषण और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं पर सीधा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

ओलंपिक पदक तालिका और खेल महासंघों पर छिड़ा विवाद
हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा भारत के ओलंपिक प्रदर्शन और पदक तालिका में सुधार को लेकर सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक विचार ने खेल जगत में नई बहस छेड़ दी है। पीएमओ ने अपने आधिकारिक हैंडल से टिप्पणी की थी कि भारत कई ओलंपिक खेलों में भाग ही नहीं लेता है, जिसके कारण पदक तालिका में देश की स्थिति सीमित रहती है। इस बयान पर दिग्गज पहलवान विनेश फोगाट ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए खेल प्रशासन और उसमें व्याप्त राजनीतिक हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पीएमओ के पोस्ट में तर्क दिया गया था कि यदि भारत को वैश्विक स्तर पर अपनी पदक संख्या बढ़ानी है, तो उसे उन खेलों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी जिनमें देश की भागीदारी नगण्य रही है। इस पर पलटवार करते हुए विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की खेल नीतियों और खेल महासंघों की वर्तमान स्थिति पर सीधा निशाना साधा।
विनेश ने खेल महासंघों में राजनीतिक हस्तक्षेप का लगाया आरोप
विनेश फोगाट ने अपने बयान में कहा कि खिलाड़ी उन खेलों में कैसे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं या नए खेलों में कैसे उतर सकते हैं, जब खेल महासंघों का संचालन ही उन लोगों के हाथों में है जिन पर गंभीर आरोप हैं। उन्होंने सीधे तौर पर सत्ताधारी दल का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि महासंघों में पार्टी से जुड़े बाहुबली और ऐसे लोग काबिज हैं, जिन पर महिला खिलाड़ियों के शोषण के आरोप लगे हैं।
पहलवान ने आगे कहा कि इन लोगों को पार्टी का संरक्षण प्राप्त है, जिससे उन्हें मनमानी करने की खुली छूट मिली हुई है। विनेश के अनुसार, जब तक खेल निकायों को ऐसे प्रभावशाली राजनीतिक लोगों के चंगुल से मुक्त नहीं कराया जाता, तब तक खिलाड़ियों का मानसिक मनोबल बना पाना और विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा में भाग लेना एक कठिन चुनौती बना रहेगा।
पुराने आंदोलन और संघर्ष की पृष्ठभूमि
विनेश फोगाट की यह टिप्पणी उनके उस लंबे संघर्ष की याद दिलाती है, जो उन्होंने साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया जैसे अन्य प्रमुख एथलीटों के साथ मिलकर भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ किया था। उस दौरान महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे और दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीनों तक विरोध प्रदर्शन किया था। यह मुद्दा न केवल खेल जगत बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी काफी समय तक चर्चा का विषय बना रहा था।
विनेश का मानना है कि ओलंपिक में पदक जीतने के लिए केवल खेलों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेल के बुनियादी ढांचे में सुधार और खिलाड़ियों के लिए एक सुरक्षित व निष्पक्ष वातावरण बनाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। जब तक खेल संघों में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक खिलाड़ियों का ध्यान पूरी तरह से अपने खेल पर केंद्रित नहीं हो पाएगा।
कंगना रनौत पर भी साधा निशाना
अपनी प्रतिक्रिया के दौरान विनेश फोगाट ने भाजपा सांसद कंगना रनौत का भी जिक्र किया। उन्होंने कंगना के हालिया बयानों पर तंज कसते हुए कहा कि जिस 'आजादी' की बात पार्टी के नेता करते हैं, वह असल में खेल महासंघों में बैठे बाहुबलियों को महिला खिलाड़ियों के उत्पीड़न की दी गई आजादी है। विनेश का यह बयान सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है और इसे खेल प्रशासन में सुधार की मांग के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल इस पूरे मामले पर सरकार या संबंधित खेल निकायों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, विनेश फोगाट के इस कड़े रुख ने एक बार फिर खेल प्रशासन में जवाबदेही और एथलीटों की सुरक्षा के मुद्दे को केंद्र में ला खड़ा किया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार खेल महासंघों की कार्यप्रणाली में कोई बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम उठाती है या नहीं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!