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वाराणसी: एयरपोर्ट पर नौकरी का झांसा देकर ठगों ने खुलवाए बैंक खाते, 4.55 लाख का हुआ संदिग्ध ट्रांजेक्शन

वाराणसी की फूलपुर पुलिस ने म्यूल अकाउंट से संबंधित गृह मंत्रालय की I4C द्वारा चिह्नित अकाउंट्स की जांच में बड़ी धांधली पकड़ी है। पुलिस ने जब चिह्नित एसबीआई खाता संख्या की जांच की तो पता चला की युवक को नौकरी का झांसा देकर उससे दो अकाउंट खुलवाकर सभी दस्तावेज मंगवाए गए और उससे लगातार साइबर फ्राड से अर्जित की गयी धनराशि का ट्रांजेक्शन किया जा रहा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

3 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
वाराणसी: एयरपोर्ट पर नौकरी का झांसा देकर ठगों ने खुलवाए बैंक खाते, 4.55 लाख का हुआ संदिग्ध ट्रांजेक्शन
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नौकरी के नाम पर फंसाया, बैंक खाते बने साइबर ठगी का जरिया

वाराणसी के फूलपुर इलाके में साइबर जालसाजों द्वारा नौकरी का झांसा देकर आम लोगों को अपना मोहरा बनाने का मामला सामने आया है। गृह मंत्रालय की साइबर सेल (I4C) द्वारा चिह्नित संदिग्ध म्यूल खातों की जांच के दौरान पुलिस ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जिसमें एक युवक के बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम खपाने के लिए किया गया। इस पूरे खेल में युवक को महज 500 रुपये का लालच देकर उसके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और निजी दस्तावेज हासिल कर लिए गए थे।

फूलपुर थाना पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान एसबीआई के एक संदिग्ध खाते की पड़ताल की गई, जो पिण्डराई निवासी अवधेश कुमार के नाम पर था। पूछताछ में पता चला कि करीब डेढ़ साल पहले एक महिला ने फोन कर उसे बाबतपुर एयरपोर्ट पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। इसी झांसे में आकर युवक ने अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते की जानकारी महिला को सौंप दी। इसके बाद जालसाजों ने उससे एक और बैंक खाता खुलवा लिया और उसका भी पूरा एक्सेस अपने पास ले लिया।

500 रुपये के बदले लाखों का लेनदेन

जालसाजों ने युवक के खातों का इस्तेमाल 'म्यूल अकाउंट' के रूप में किया। इन खातों के जरिए कुल 4.55 लाख रुपये का संदिग्ध ट्रांजेक्शन किया गया। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर इन खातों के खिलाफ कुल पांच शिकायतें दर्ज हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मध्य प्रदेश के रीवा और रायसेन, झारखंड के रांची और उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल से साइबर ठगी की शिकायतें शामिल हैं। अकेले रांची में दर्ज शिकायत में ही 3.78 लाख रुपये के लेनदेन का पता चला है।

पुलिस के अनुसार, युवक ने नौकरी के लालच में न केवल अपने खाते जालसाजों को सौंपे, बल्कि इसकी जानकारी पुलिस या बैंक को भी नहीं दी। प्रथम दृष्टया यह मामला लापरवाही और मिलीभगत का प्रतीत होता है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अवधेश कुमार के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

क्या होते हैं म्यूल अकाउंट और कैसे रहें सावधान

साइबर विशेषज्ञ बताते हैं कि 'म्यूल अकाउंट' वे खाते होते हैं जिनका उपयोग अपराधी अपनी अवैध कमाई को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए करते हैं। अक्सर जालसाज नौकरी, कमीशन या उपहार का लालच देकर लोगों से उनके बैंक खाते और एटीएम कार्ड ले लेते हैं। जब पुलिस इन खातों की जांच करती है, तो असली अपराधी के बजाय खाताधारक ही कानून के शिकंजे में फंस जाता है।

पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते, एटीएम पिन या ओटीपी साझा न करें। नौकरी के नाम पर यदि कोई व्यक्ति बैंक खाते की मांग करता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना नजदीकी थाने या साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर पर दी जानी चाहिए।

फिलहाल, पुलिस इस गिरोह के पीछे सक्रिय उस महिला और अन्य सहयोगियों की तलाश कर रही है जिन्होंने इस पूरे जाल को बिछाया था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस तरह के और कितने खाते इस गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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