इतिहास में पहली बार: वंदे भारत एक्सप्रेस से पहुंचा धड़कता दिल, सूरत से अहमदाबाद तक बना ग्रीन कॉरिडोर
Vande Bharat Express transports live heart from Surat to Ahmedabad for transplant. देश में पहली बार एक जिंदा दिल को ट्रांसप्लांटेशन के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस से ले जाया गया। इस हार्ट ट्रांसप्लांटेशन के लिए सूरत से अहमदाबाद के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

भारत में चिकित्सा और परिवहन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। देश में पहली बार किसी जीवित मानव हृदय को प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के जरिए एक शहर से दूसरे शहर तक सुरक्षित पहुंचाया गया। यह अनूठी पहल सूरत से अहमदाबाद के बीच की गई, जहां रेलवे, पुलिस और चिकित्सा विभाग के आपसी तालमेल ने एक जीवन बचाने के लिए समय के खिलाफ दौड़ लगाई।
250 किलोमीटर का सफर 217 मिनट में पूरा
सूरत से अहमदाबाद के बीच की लगभग 250 किलोमीटर की दूरी को वंदे भारत एक्सप्रेस ने महज 217 मिनट में तय किया। हृदय को एक विशेष तापमान-नियंत्रित बॉक्स और घोल में सुरक्षित रखा गया था ताकि उसकी जीवनक्षमता बनी रहे। इस पूरी प्रक्रिया में सटीकता और गति सबसे महत्वपूर्ण थी, जिसे रेलवे की इस हाई-स्पीड ट्रेन ने बखूबी अंजाम दिया।
हृदय को अस्पताल से सूरत रेलवे स्टेशन तक लाने के लिए एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। इसी तरह, अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद, वहां से यूएन मेहता इंस्टीट्यूट तक हृदय को तेजी से पहुंचाने के लिए गुजरात पुलिस और आरपीएफ ने विशेष सुरक्षा घेरा और ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया था, जिससे बिना किसी ट्रैफिक बाधा के अंग को अस्पताल तक पहुंचाया जा सका।
चार एजेंसियों का अभूतपूर्व समन्वय
इस जटिल ऑपरेशन की सफलता के पीछे चार प्रमुख एजेंसियों का समन्वय रहा। भारतीय रेलवे, गुजरात पुलिस, आरपीएफ और मेडिकल टीमों ने मिलकर काम किया। अहमदाबाद के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) वेद प्रकाश ने इसे भारतीय रेलवे के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से अंग परिवहन ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और सही योजना से जीवन बचाने की संभावनाओं को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।
राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में हर सेकंड कीमती होता है। वंदे भारत की तेज रफ्तार ने इस कठिन कार्य को संभव बनाया। उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सराहना की, जिन्होंने अब तक 77 सफल हार्ट ट्रांसप्लांट करके चिकित्सा जगत में मिसाल कायम की है।
अंग प्रत्यारोपण की वैज्ञानिक प्रक्रिया
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर से बाहर निकाले जाने के बाद हृदय को लगभग 4 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखा जाता है। हृदय की रक्त वाहिकाओं को एक विशेष ठंडे घोल से धोया जाता है ताकि उसमें मौजूद रक्त निकल जाए और अंग की ऑक्सीजन की मांग न्यूनतम हो जाए। इसके बाद हृदय को स्टरलाइज्ड बैग में रखकर बर्फ से भरे कंटेनर में रखा जाता है।
सामान्य तौर पर, हृदय प्रत्यारोपण के लिए 6 घंटे का समय सबसे सुरक्षित माना जाता है। समय बीतने के साथ अंग की सफलता दर कम होने लगती है, इसलिए परिवहन के दौरान हर मिनट का महत्व होता है। वंदे भारत एक्सप्रेस की समयबद्धता और गति ने इस महत्वपूर्ण समय सीमा के भीतर अंग को गंतव्य तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
यह घटना भविष्य में अंग प्रत्यारोपण के लिए परिवहन के नए रास्ते खोलती है। अब तक सड़क मार्ग या हवाई एम्बुलेंस पर निर्भर रहने वाली इस प्रक्रिया में ट्रेन का उपयोग एक सस्ता और विश्वसनीय विकल्प साबित हो सकता है, विशेषकर उन शहरों के बीच जहां रेल कनेक्टिविटी बेहतर है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
