UPSC 2026 विवाद: अभ्यर्थियों ने सांसद दीपेंद्र हुड्डा से की मुलाकात, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की उठाई मांग
UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा से उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से युवाओं का विश्वास लगातार कमजोर हुआ है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा से उनके आवास पर मुलाकात की। छात्रों ने इस दौरान एक ज्ञापन सौंपकर परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और जवाबदेही तय करने की मांग की है।
26 विवादित प्रश्नों पर छात्रों का विरोध
प्रतिनिधिमंडल में शामिल अभ्यर्थियों ने मुख्य रूप से प्रोविजनल आंसर-की में मौजूद खामियों पर चिंता जताई। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा की प्रोविजनल आंसर-की में कुल 26 उत्तर विवादित हैं। इनमें सामान्य अध्ययन (GS-I) के 14 और CSAT (GS-II) के 12 प्रश्न शामिल हैं। अभ्यर्थियों की मांग है कि मुख्य परीक्षा (Mains) शुरू होने से पहले आयोग को फाइनल आंसर-की जारी करनी चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
इसके अलावा, CSAT प्रश्नपत्र को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। छात्रों का कहना है कि CSAT का स्तर निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं था, जिसके कारण ग्रामीण पृष्ठभूमि और गैर-विज्ञान वर्ग के छात्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस प्रतिनिधिमंडल में सोनाक्षी यादव, श्वेता, बसंत कुमार, अंकुश, सोमेश और सूरज सहित कई अभ्यर्थी शामिल थे।
शिक्षा प्रणाली पर सांसद की चिंता
सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने छात्रों की बात सुनने के बाद परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से युवाओं का विश्वास लगातार कम हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों और पारदर्शिता के अभाव ने प्रतिभाशाली युवाओं को हताशा की स्थिति में धकेल दिया है। हुड्डा के अनुसार, जंतर-मंतर पर युवाओं का प्रदर्शन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वे अब व्यवस्था में व्यापक बदलाव चाहते हैं।
सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं की मांग केवल पेपर लीक या नकल रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पूरी परीक्षा प्रक्रिया में जवाबदेही चाहते हैं। उन्होंने कहा कि न्याय सुनिश्चित करना ही एकमात्र तरीका है जिससे युवाओं का भरोसा वापस जीता जा सकता है। उन्होंने छात्रों को आश्वासन दिया कि वे इन मुद्दों को उचित मंचों पर मजबूती से उठाएंगे।
आगे की राह और छात्रों का संघर्ष
UPSC अभ्यर्थी लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का तर्क है कि यदि समय रहते विवादित प्रश्नों का समाधान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर योग्य उम्मीदवारों के भविष्य पर पड़ेगा। वे मांग कर रहे हैं कि आयोग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए छात्रों के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए।
फिलहाल, इस मुलाकात के बाद छात्रों को उम्मीद है कि उनकी आवाज संसद तक पहुंचेगी और प्रशासन इस पर संज्ञान लेगा। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुकी है, जिस पर सरकार और आयोग की प्रतिक्रिया का सभी को इंतजार है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
