यूपी में घटिया एंटीबायोटिक सप्लाई पर बड़ी कार्रवाई: एथेंस लाइफ साइंस कंपनी तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट
UP Medical Supplies Corporation blacklists Athens Life Science for 3-year ban. यूपी मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन (यूपी-MSCL) ने बैक्टीरिया जनित रोगों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली एमोक्सिसिलिन, पोटेशियम क्लैवुलनेट टेबलेट की निर्माता एथेंस लाइफ साइंस को तीन साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। एमोक्सिसिलिन, पेनिसिलिन श्रेणी की एंटीबायोटिक दवा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन (यूपी-एमएससीएल) ने दवाओं की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करने वाली एक फार्मा कंपनी के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। राज्य में बैक्टीरिया जनित रोगों के उपचार के लिए इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक दवाओं की आपूर्ति करने वाली कंपनी 'एथेंस लाइफ साइंस' को तीन साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने सरकारी अस्पतालों के लिए घटिया दर्जे की दवाओं की आपूर्ति की थी।
दवाओं के सैंपल जांच में फेल
मामला एमोक्सिसिलिन और पोटेशियम क्लैवुलनेट टैबलेट से जुड़ा है, जो पेनिसिलिन श्रेणी की महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक दवाएं हैं। इन दवाओं का उपयोग कान, नाक और गले के गंभीर संक्रमण को ठीक करने के लिए किया जाता है। यूपी-एमएससीएल ने सितंबर 2025 में इस कंपनी के साथ दवाओं की खरीद का अनुबंध किया था। आपूर्ति के बाद जब इन दवाओं के दो बैचों (डीबीटी-25-048 और डीबीटी-25-108) को गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया, तो परिणाम चौंकाने वाले थे।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि दवाएं मानक स्तर की नहीं हैं। इनमें मौजूद रसायनों का अनुपात भी सही नहीं पाया गया, जिससे यह संक्रमण को रोकने में पूरी तरह से अप्रभावी साबित हो रही थीं। स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, ऐसी दवाओं का सेवन मरीजों के लिए जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि ये बीमारी को नियंत्रित करने में विफल रहती हैं।
नोटिस का जवाब न देने पर कार्रवाई
यूपी-एमएससीएल के प्रबंध निदेशक उज्जवल कुमार ने बताया कि लैब रिपोर्ट आने के बाद 21 मई को ही इन बैचों की दवाओं के वितरण और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई थी। इसके बाद, हिमाचल प्रदेश स्थित एथेंस लाइफ साइंस कंपनी को स्पष्टीकरण देने के लिए दो बार नोटिस जारी किए गए। हालांकि, कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिसके बाद प्रशासन ने इसे ब्लैकलिस्ट करने का कड़ा निर्णय लिया।
इस प्रतिबंध के तहत, अगले तीन वर्षों तक उत्तर प्रदेश सरकार इस कंपनी से किसी भी प्रकार की एमोक्सिसिलिन और पोटेशियम क्लैवुलनेट टैबलेट की खरीद नहीं करेगी। इसके अलावा, कंपनी के खिलाफ विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।
मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता
सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। घटिया दवाओं की आपूर्ति न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग है, बल्कि यह मरीजों के जीवन के साथ भी खिलवाड़ है। इस कार्रवाई से अन्य दवा आपूर्तिकर्ताओं के बीच भी कड़ा संदेश गया है कि गुणवत्ता के मानकों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग अब उन अन्य बैचों की भी गहन जांच कर रहा है जो इस कंपनी द्वारा राज्य के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई किए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि मरीजों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए दवाओं की रैंडम सैंपलिंग और लैब टेस्टिंग की प्रक्रिया को और अधिक तेज किया जाएगा।
यह घटना स्वास्थ्य क्षेत्र में दवाओं की खरीद और आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। भविष्य में दवाओं की खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सख्त बनाने पर विचार किया जा रहा है ताकि किसी भी स्तर पर घटिया दवाएं मरीजों तक न पहुंच सकें।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
