उत्तर प्रदेश में गौ-संरक्षण को मिली नई रफ्तार, 14 नई गौशालाओं का हुआ लोकार्पण
UP Animal Husbandry Minister Dharampal Singh launches 14 new gaushalas. उत्तर प्रदेश सरकार ने गौसंरक्षण को लेकर अपनी योजनाओं का दायरा बढ़ाते हुए सोमवार को प्रदेश में 14 नई गौशालाओं का लोकार्पण किया। इस मौके पर पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि राज्य में वर्तमान समय में करीब 12 लाख निराश्रित गौवंश की देखभाल की जा रही है, जिस पर सरकार प्रतिदिन लगभग ₹8 करोड़ खर्च कर रही है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में निराश्रित गौवंश के संरक्षण और उनके बेहतर प्रबंधन के लिए अपने प्रयासों को और अधिक विस्तार दिया है। इसी क्रम में सोमवार को प्रदेश भर में 14 नई गौशालाओं का आधिकारिक रूप से लोकार्पण किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना और उनकी उचित देखभाल सुनिश्चित करना है।
गौवंश के भरण-पोषण के लिए बढ़ाई गई सहायता राशि
राज्य के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने इस अवसर पर जानकारी दी कि सरकार गौवंश की स्थिति सुधारने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछली सरकारों के कार्यकाल की तुलना में वर्तमान सरकार ने गौवंश के भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की है। पहले जहां एक गौवंश के लिए प्रतिदिन 30 रुपये की सहायता दी जाती थी, उसे अब बढ़ाकर 50 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।
मंत्री के अनुसार, इस बढ़ी हुई धनराशि का सीधा लाभ गौशालाओं में पल रहे पशुओं को मिलेगा। इससे उनके लिए बेहतर गुणवत्ता वाला चारा, समय पर चिकित्सा सुविधा और रहने के लिए सुरक्षित शेड जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में आसानी होगी। सरकार का स्पष्ट मानना है कि पर्याप्त संसाधनों के बिना गौ-संरक्षण का लक्ष्य हासिल करना कठिन है।
12 लाख गौवंश की देखभाल पर रोजाना 8 करोड़ का खर्च
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में उत्तर प्रदेश की विभिन्न गौशालाओं में लगभग 12 लाख निराश्रित गौवंश को संरक्षित किया गया है। इन पशुओं की देखभाल और उनके खान-पान की व्यवस्था पर सरकार प्रतिदिन करीब 8 करोड़ रुपये का व्यय कर रही है। यह एक बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी है जिसे राज्य सरकार गौ-संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के रूप में देख रही है।
नई गौशालाओं के निर्माण से इस क्षमता में और अधिक वृद्धि होने की उम्मीद है। इन केंद्रों पर स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त चारे की उपलब्धता और पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित जांच के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी गौवंश बेसहारा होकर सड़कों पर न घूमे और न ही दुर्घटनाओं का शिकार हो।
गौ-संरक्षण की दिशा में भविष्य की राह
प्रदेश सरकार की यह योजना केवल पशुओं को आश्रय देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। गौशालाओं के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। मंत्री धर्मपाल सिंह ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में गौशालाओं की संख्या और सुविधाओं में और भी सुधार किया जाएगा।
प्रशासनिक स्तर पर इन गौशालाओं की निगरानी के लिए भी सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि आवंटित धनराशि का सही उपयोग हो सके। स्थानीय अधिकारियों को समय-समय पर गौशालाओं का निरीक्षण करने और वहां की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के लिए कहा गया है। सरकार का जोर इस बात पर है कि गौवंश को न केवल सुरक्षित रखा जाए, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन भी प्रदान किया जाए।
इस पहल के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि गौ-संरक्षण उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। आने वाले महीनों में अन्य जिलों में भी इसी तरह के और केंद्र खोले जाने की संभावना है, जिससे निराश्रित पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
