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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: सीएम योगी को मिली कमान, प्रत्याशी चयन से रणनीति तक अब लखनऊ का होगा फैसला

विधानसभा चुनाव की कमान सीएम योगी के हाथ रहेगी भाजपा नेतृत्व ने नौ साल बाद दिया फ्री हैंड, प्रत्याशी चयन से लेकर चुनावी रणनीति तक में योगी का नेतृत्व

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

21 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
यूपी विधानसभा चुनाव 2027: सीएम योगी को मिली कमान, प्रत्याशी चयन से रणनीति तक अब लखनऊ का होगा फैसला
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2027 के महासंग्राम के लिए योगी आदित्यनाथ को मिला 'फ्री हैंड'

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनाव संचालन के लिए पूरी तरह से 'फ्री हैंड' दे दिया है। अब राज्य में प्रत्याशियों के चयन से लेकर चुनावी रणनीति तैयार करने तक की मुख्य जिम्मेदारी सीधे मुख्यमंत्री के हाथों में होगी। इस निर्णय के बाद लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और सीएम योगी ने अपनी चुनावी गतिविधियों को गति देना शुरू कर दिया है।

इस बदलाव के पीछे लोकसभा चुनाव के नतीजों को एक बड़ा सबक माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ने कई मौजूदा सांसदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका देने का सुझाव दिया था, जिसे केंद्रीय नेतृत्व ने उस समय स्वीकार नहीं किया था। परिणाम यह रहा कि पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। अब उसी अनुभव से सीखते हुए हाईकमान ने विधानसभा चुनाव की कमान पूरी तरह से योगी आदित्यनाथ को सौंपने का निर्णय लिया है।

प्रत्याशी चयन में अब दिल्ली नहीं, लखनऊ की चलेगी

वर्ष 2017 के बाद से हुए चुनावों में टिकट वितरण और रणनीति के अधिकांश फैसले दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय से होते थे। हालांकि, इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अब प्रत्याशियों के नाम तय करने की प्रक्रिया में सीएम योगी के साथ संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह और आरएसएस के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार व महेंद्र कुमार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा, राज्य की कोर कमेटी में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी विचार-विमर्श का हिस्सा होंगे।

योगी आदित्यनाथ ने आगामी विधान परिषद चुनावों के माध्यम से अपने काम करने के तरीके के संकेत भी दे दिए हैं। शिक्षक और स्नातक क्षेत्र की सीटों के लिए उन्होंने स्पष्ट मानदंड तय किए हैं, जिसमें उम्मीदवार की सक्रियता और उनके द्वारा बनाए गए मतदाताओं की संख्या को टिकट का आधार बनाया गया है। विशेष रूप से वाराणसी और प्रयागराज-झांसी जैसी सीटों पर सीएम का विशेष ध्यान है, जो वर्तमान में विपक्षी दलों के पास हैं।

बगावत रोकने के लिए 'प्लान-बी' और सहयोगी दलों की स्थिति

पार्टी के आंतरिक सर्वे में 190 से 205 सीटों के बीच जीत का अनुमान लगाया गया है। इस स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए भाजपा ने बगावत रोकने की रणनीति तैयार की है। जिन विधायकों के खिलाफ नकारात्मक माहौल है, उन्हें सीधे टिकट काटने के बजाय दूसरी सुरक्षित सीटों पर स्थानांतरित करने का विकल्प अपनाया जाएगा। केवल उन्हीं विधायकों के टिकट काटे जाएंगे जिनका प्रभाव क्षेत्र में नगण्य है। इससे पार्टी के भीतर असंतोष को कम करने की कोशिश की जाएगी।

हालांकि, एनडीए के सहयोगी दलों जैसे अपना दल (एस), आरएलडी, निषाद पार्टी और सुभासपा के साथ सीटों के तालमेल और गठबंधन से जुड़े अंतिम निर्णय अभी भी केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर ही लिए जाएंगे। राज्य स्तर पर योगी आदित्यनाथ की टीम पूरी तरह से भाजपा के अपने उम्मीदवारों और चुनावी प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करेगी, ताकि 2027 में पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापस लाया जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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