उन्नाव: 10 साल पुराने युवती हत्याकांड में दोषी को उम्रकैद, अदालत ने सुनाया फैसला
Unnao court delivers verdict in decade old murder case, convict sentenced to life imprisonment. उन्नाव की एडीजे-प्रथम अदालत ने करीब 10 साल पुराने युवती हत्याकांड में दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

न्याय में देरी, पर मिला इंसाफ: एक दशक पुराने मामले में सजा
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की एडीजे-प्रथम अदालत ने एक दशक पुराने युवती हत्याकांड मामले में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी विमलेश यादव को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह फैसला उस घटना के करीब 10 साल बाद आया है जिसने स्थानीय क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था।
घटना का विवरण देते हुए अभियोजन पक्ष ने बताया कि मौरावां थाना क्षेत्र के टोपरा गांव की रहने वाली आरती देवी वर्ष 2016 में हरियाणा के करनाल से अपने मायके आई थीं। 4 अक्टूबर 2016 को वह घर से कुछ सामान लेने के बहाने निकलीं, लेकिन इसके बाद वह वापस नहीं लौटीं। परिजनों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल सका।
झाड़ियों में मिला था शव, कपड़ों से हुई पहचान
युवती के लापता होने के करीब 10 दिन बाद, 14 अक्टूबर 2016 को पिंजरा गांव के निकट झाड़ियों में एक महिला का शव बरामद हुआ। मृतका के परिजनों ने कपड़ों, चप्पलों और चूड़ियों के आधार पर शव की पहचान आरती देवी के रूप में की। इस घटना के बाद मृतका के पिता रामू ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी की हत्या कर शव को ठिकाने लगाने का आरोप लगाया था।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की। विवेचना के दौरान महरानीखेड़ा गांव निवासी विमलेश यादव का नाम सामने आया। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर उसके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। एडीजे-प्रथम कविता मिश्रा की अदालत में चले इस लंबे मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से अजय कुशवाहा ने गवाहों और साक्ष्यों को मजबूती से पेश किया, जिसके आधार पर अदालत ने विमलेश को दोषी माना।
जिले की अदालतों में अन्य मामलों पर भी आए फैसले
उन्नाव की अदालतों में मंगलवार का दिन न्याय के लिहाज से काफी व्यस्त रहा। हत्या के मामले के अलावा, फास्ट ट्रैक कोर्ट ने वर्ष 2022 के दुष्कर्म के एक मामले में भी फैसला सुनाया। सफ़ीपुर थाना क्षेत्र के दमगढ़ी निवासी आरोपी अनूप को अदालत ने दोषी पाया और उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 21 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
इसके अतिरिक्त, सीएडब्ल्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना से जुड़े एक पुराने मामले में भी सजा का ऐलान किया। यह मामला वर्ष 2001 का था, जिसमें फतेहपुर चौरासी थाना क्षेत्र के दबौली निवासी रामऔतार को दोषी ठहराया गया। अदालत ने उसे छह माह के कारावास और तीन हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
इन फैसलों ने एक बार फिर यह साबित किया है कि कानून अपना काम कर रहा है, चाहे मामला कितना भी पुराना क्यों न हो। पीड़ित परिवारों ने अदालत के इन निर्णयों पर संतोष व्यक्त किया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह की सजाएं समाज में एक कड़ा संदेश देती हैं और अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा करती हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
